राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव के कुनबे पर पड़े आयकर विभाग के छापों की अपनी अलग सियासी अहमियत और माने थे जिस ने विनोबा भावे की भी याद दिला दी जो जमीनें मांगने का काम ठीक वैसे ही किया करते थे जैसे मौजूदा सरकार लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने के बाद रेल किराए की सब्सिडी के भी त्याग करने की बात कर रही है.

रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद यादव ने रेलवेस्टेशन के होटलों के ठेकों के एवज में कथित घूस में नकदी से परहेज किया था और जमीन को प्राथमिकता दी तो जर और जोरू के बाद जमीन की महत्ता लोगों को समझ आई कि यह घूस और दान दोनों में चलती है. भूदान या भू-घूस में इकलौता फायदा यह है कि इसे अदालत में घूस साबित कर पाना मुश्किल होता है. इसलिए, मुमकिन है 10-15 वर्षों बाद उन्हें राहत मिल जाए पर भाजपा के मिट्टी में मिलने तक तो उन की आफत ही है.

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