फिल्म इंडस्ट्री को उद्योग का दर्जा मिलने के साथसाथ बौलीवुड पर राजनीतिक शिकंजा कसना शुरू हुआ और बौलीवुड जाति, धर्म, ऊंच नीच व राजनीतिक सोच के अनुसार कई खेमों में बंटता चला गया.

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चेयरमैन, गीतकार व फिल्म पटकथा लेखक प्रसून जोशी तथा कुछ निर्माताओं की पहल पर कई फिल्मी कलाकारों, निर्माता व निर्देशकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मुलाकात कर फिल्म इंडस्ट्री के विकास पर चर्चा की थी. उस के बाद अपने मुंबई आगमन पर भी कुछ फिल्मी हस्तियों संग प्रधानमंत्री ने मुलाकात कर काफी तसवीरें खिंचवाई थीं. लेकिन हकीकत में फिल्म इंडस्ट्री के हालात सुधरने के बजाय बदतर ही हुए हैं. फिल्म इंडस्ट्री के बदतर हालात के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम कुसूरवार नहीं हैं.

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