Teen Mobile Addiction: मेरी उम्र 42 वर्ष है. मैं गृहिणी हूं. मेरी 15 साल की बेटी स्कूल से आते ही मोबाइल ले कर बैठ जाती है. पढ़ाई, परिवार से बातचीत और बाहर खेलना लगभग बंद हो गया है. मोबाइल कुछ देर के लिए ले लूं तो गुस्सा करने लगती है. बताइए कि मैं क्या करूं?
आज के दौर में लगभग हर घर की यही कहानी है. मोबाइल बच्चों की दुनिया का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में हर मां की चिंता स्वाभाविक है कि कहीं यह आदत उन की पढ़ाई, व्यवहार और रिश्तों पर भारी न पड़ जाए.
इस उम्र में दोस्तों से जुड़े रहना, सोशल मीडिया देखना या औनलाइन मनोरंजन की ओर आकर्षित होना सामान्य बात है लेकिन जब मोबाइल की वजह से पढ़ाई, परिवार और खेलकूद प्रभावित होने लगें, तब समय रहते संतुलित कदम उठाना आवश्यक हो जाता है.
बेटी से बारबार डांट कर या अचानक मोबाइल छीन कर समस्या हल नहीं होगी. इस से वह खुद को नियंत्रित किए जाने का एहसास कर सकती है और आप दोनों के बीच की दूरी बढ़ सकती है. इस के बजाय किसी शांत समय पर उस से प्यार से बात करें. उस की बात भी पूरे धैर्य से सुनें. जानने की कोशिश करें कि उसे मोबाइल में सब से अधिक क्या पसंद है- दोस्तों से बातचीत, गेम, वीडियो या कुछ और. जब बच्चा महसूस करता है कि उस की बात सुनी जा रही है तो वह भी मातापिता की बात सुनने के लिए तैयार होता है. साथ ही, बेटी को ऐसे विकल्प दें जिन में उसे आनंद आए. उस की रुचि के अनुसार कोई खेल, डांस, संगीत, पेंटिंग या अन्य रचनात्मक गतिविधि शुरू करवाई जा सकती है. सप्ताहांत में परिवार के साथ बाहर घूमना, बोर्ड गेम खेलना या साथ बैठ कर कोई पसंदीदा व्यंजन बनाना भी रिश्तों को फिर से गरमाहट देता है.
याद रखिए, आप की बेटी को इस समय सब से अधिक जरूरत आप की डांट की नहीं, बल्कि आप के विश्वास, धैर्य और साथ की है. प्यार और समझदारी से बनाए गए छोटेछोटे नियम धीरेधीरे उस की मोबाइल की आदत को संतुलित कर सकते हैं. Teen Mobile Addiction





