Crime Stories: पुणे का केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को झकझोर गई, घटना ने मानवीय संवेदनाओं को भी हिलाकर रख दिया और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. इस घटना के मुख्य पात्र रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल (26 वर्ष), मंगेतर सिया गोयल (20 वर्ष) और उस का प्रेमी चेतन चौधरी (22 वर्ष) हैं.

जांच में सामने आया कि केतन की मंगेतर सिया और उस का प्रेमी चेतन पहले से एकदूसरे के साथ संबंध में थे. दोनों अपने भविष्य को साथ देखना चाहते थे, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक अपेक्षाओं और आर्थिक असमानता ने उन के रिश्ते को स्वीकार नहीं किया. इसी बीच सिया के परिवार ने उस का रिश्ता केतन से तय कर दिया. आरोप है कि इस रिश्ते को अपने प्रेम के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मानते हुए सिया और चेतन ने केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

योजना के तहत केतन को घुमने के बहाने पुणे के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले ले जाया गया. वहां सुनसान स्थान पर अवसर मिलते ही उसे लगभग 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया गया. इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण उस की मौके पर ही मौत हो गई. शुरुआत में इसे दुर्घटना की तरह पेश किया गया.

सिया ने पुलिस को बताया कि केतन फोटो खींचते समय फिसल गया. जबकि पिता विशाल अग्रवाल ने कहा कि केतन अनुभवी ट्रेकर था और इतनी लापरवाही नहीं कर सकता. इस हफ्ते में केतन के दादा देवीचंद 17 दिन बाद चल बसे. परिवार ने दो पीढ़ियों को एक साथ खो दिया.

इस जघन्य अपराध ने केतन के परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है. केतन अपने पेरेंट्स का इकलौता बेटा था. जांच के दौरान मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पूछताछ ने मामले को हत्या की दिशा में मोड़ दिया.

इस घटना ने केवल एक युवक की जान ही नहीं ली, बल्कि दो परिवारों की दुनिया भी उजाड़ दी. सबसे मार्मिक तसवीर केतन के पिता विशाल अग्रवाल के शब्दों में सामने आती है. उन्होंने कहा कि उन का दुख समंदर से भी बड़ा है. जिस बेटे की शादी की तैयारियां और घर में बहू के स्वागत के सपने उन्होंने संजोए थे, उसी बेटे की अर्थी उठानी पड़ी, वो भी उस बहू सिया की वजह से वह शादी को मना कर सकती थी, बेटे की जान लेने की क्या जरूरत थी?

यह मामला केवल एक प्रेमत्रिकोण की कहानी नहीं, बल्कि  गहरी साजिश का नतीजा है. यदि हिंसा का मार्ग चुना जाता है, तो उस का परिणाम केवल एक व्यक्ति की मृत्यु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई परिवारों का भविष्य भी बिखर जाता है. यह एक ऐसी अपराध आधारित सामाजिक कथा है, जिसमें प्रेम, विश्वास, महत्वाकांक्षा, पारिवारिक दबाव और कथित साजिश एक दूसरे से टकराते हैं.

यह कहानी सबक़ देती है कि किसी भी रिश्ते का अंत अलग होने से हो सकता है, लेकिन किसी इंसान का जीवन छीनने से नहीं. अंततः कानून अपना रास्ता तय करता है, जबकि पीछे छूट जाते हैं केवल टूटे हुए सपने, बिखरे हुए परिवार और ऐसा दर्द, जिस की भरपाई कभी संभव नहीं होती.

पुलिस ने पुणे के लोहागढ़ की सीसीटीवी फुटेज देखी, जिस में चेतन को हुडी पहने हुए देखा गया. कौल कॉल रिकौर्ड्स और लोकेशन डेटा ने सिया और चेतन के रिश्ते को उजागर किया. सिया और चेतन का गुप्त संबंध इस हत्या की जड़ था. फरवरी में सगाई हुई थी और नवंबर में जयपुर में 17 करोड़ रुपये खर्च कर भव्य शादी की योजना थी. स्वाभाविक बात है कि सिया ने सारे का पंडे पुजारियों से पूछ कर किए होंगे. उन्होंने कुंडलियां मिलाई होंगी. शुभ मुहुर्त निकलवाएं होंगे. इस तरह के पाखंडों के बावजूद 2 परिवार जीवन भर के लिए अपनों के खोए या जेलों में देखेंगे और पछताएंगे और पंडितों को फर्क नहीं पड़ेगा. वे यह कह कर चल पड़ेंगे. सब भाग्य की बात.

यह केस रिश्तों में विश्वासघात और लालच की भयावह मिसाल बन गया.  यह घटना दोस्ती, विश्वासघात और एक हंसतेखेलते परिवार के पूरी तरह तबाह होने की एक दर्दनाक दास्तां है. चेतन और सिया ने किस तरह केतन को ठिकाने लगाने की योजना बनाई ? सिया ने शादी से पहले की सभी रस्में किस तरह निभाई? शादी से इंकार क्यों नहीं किया और भी बहुत कुछ छिपा है इस कहानी में. यह पेरेंट्स की अपने व्यस्क हो चुके बेटे बेटियों को पूरी तरह न समझ पाने की कमी भी जाहिर करती है. Crime Stories

लंबी कहानी मनोहर कहानियां के अगस्त अंक में पढ़ें.

 

 

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