Lucknow Kanpur Expressway: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जुलाई 2026 को 63 किलोमीटर लम्बे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का भव्य उद्घाटन किया. इस एक्सप्रेस-वे से लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा का समय जो पहले करीब ढाई घंटा होता था, घट कर मात्र 50 मिनट रह गया है. साढ़े चार साल में बन कर तैयार हुआ यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश का पहला बैरियर फ्री एक्सप्रेस-वे है. यानी इस पर गाड़ियों को कहीं रुकना नहीं पड़ेगा. एआई आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग होगी और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन रीडर के जरिये टोल वसूली होगी.
इस रास्ते की ख़ास बात यह है कि पूरी सड़क का लेवल एकसमान है, लिहाजा 120 की रफ़्तार पर भी वाहन उछलेगा नहीं, फर्राटा भरता निकल जायेगा. गडकरी साहब ने इस हाई स्पीड सड़क का निर्माण हाईटेक मशीनों से करवाया है. ऐसी ऐसी मशीनें जिनका पहले नाम भी नहीं सुना गया था. मगर गडकरी साहब को शायद पता नहीं कि इस एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे के नीचे हजारों किसान दर्द से कराह रहे हैं.
बता दें कि इस रास्ते को बनाने के लिए हजारों किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गयीं. अनेकों किसानों को अभी मुआवजा भी पूरा नहीं मिल पाया है. आश्वासन जरूर उनकी झोलियों में हैं कि पैसा जल्दी ही पूरा मिल जाएगा. खैर जैसे 15 लाख खाते में आने का रास्ता देख रहे हैं वैसे मुआवजे की भी देख लेंगे. मगर दूसरी मुसीबत इससे बड़ी है.
एक्सप्रेस-वे बनने के बाद इसके दोनों तरफ बसे गांव के किसान इस बात को लेकर हैरान हैं कि अब जबकि इस चमचमाती सड़क पर हजारों वहां दौड़ने लगे हैं, वे उनके बीच से निकल कर अपने खेतों तक कैसे पहुचें?
सरोजनीनगर क्षेत्र में आने वाले विभूतीखेड़ा गांव के किसान कमलेश कहते हैं कि उनका गांव-घर जहां एक्सप्रेस-वे के दाहिने तरफ है, वहीं उनके उनके खेत एक्सप्रेस वे के बाएं तरफ हैं. पहले जब तक रास्ता बन रहा था तो कमलेश सड़क क्रॉस कर अपने खेत में चले जाते थे. अपने हल-बैल ले आते थे. उनके बीवी बच्चे भी दोपहर में खेत पर आकर काम करते थे. मगर अब यह रास्ता ही बंद हो गया है. एक्सप्रेस-वे बन कर पूरा हुआ तो उसके दोनों किनारों पर ऊंची जाली लगा दी गई है और सड़क के बीच में ऊंचा डिवाइडर है, जिसे फाँदना मुश्किल है.
गडकरी साहब ने चमचमाता एक्सप्रेस-वे बना दिया मगर यह देखा ही नहीं कि उसके दोनों तरफ बसने वाले सैकड़ों किसान अपने खेतों तक कैसे पहुंचेंगे? अपने हल बैल कैसे ले जायेंगे क्योंकि न तो एक्सप्रेस-वे बनाते समय इसके नीचे कहीं अंडरपास बनाया गया है और न उसके ऊपर कोई फुटओवर ब्रिज है. ऐसे में हजारों किसानों की खेती की जमीन फंस के रह गई है. वाह रे गडकरी का विकास!
होना तो यह चाहिए था कि एक्सप्रेस-वे के नीचे हर दो-चार किलोमीटर पर अंडरपास बनते ताकि किसान अपने खेतों तक जा पाते, बच्चे स्कूल जा पाते, औरतें अपने कामकाज पर निकल सकतीं, यहां तो गडकरी के विकास ने गरीब के रास्ते ही बंद कर दिए. आखिर ऐसा एक्सप्रेस-वे किस काम का जो देश का पेट भरने वाले अन्नदाता की राह रोक कर खड़ा है.
ऐसे चमचमाते एक्सप्रेस-वे तो सिर्फ अमीरों की बड़ी चमचमाती गाड़ियों के लिए ही हैं, गरीब तो इन पर कदम भी नहीं रख सकता है. फिर इस महंगे रास्ते पर मध्यमवर्गीय लोग भी अपनी गाड़ियां ले जाते हुए हिचकिचाएंगे क्योंकि जो टोल टैक्स गडकरी साहब वसूलने वाले हैं वह अदा करने का बूता माध्यम आय वालों में नहीं है. कार, जीप और एसयूवी के लिए एक तरफ का टोल रेट रु.275/- है, हल्के कमर्शियल वाहन के लिए रु.445/- है, बस और ट्रक के लिए रु.935/- है तो भारी वाहन रु.1020/- चुका कर ही इस रास्ते से जा सकते हैं. अगर 24 घंटे में वापसी करनी हो तो कार, जीप और एसयूवी को रु.415/-, हल्के कमर्शियल वाहन को रु.670/-, बस और ट्रक ड्राइवर को रु. 1405/- और भारी वाहन को रु.1530/- चुकाने होंगे. यानी आम जनता के लिए बस का किराया बढ़ना निश्चित है, क्योंकि बस मालिक टोल अपनी जेब से तो देगा नहीं. ट्रक ड्राइवर भी सामान ले जाने के लिए रेट बढ़ाएंगे. कुल जमा यह कि ये ‘उद्घाटन-सरकार’ के ये चमचमाते हुए एक्सप्रेस-वे गरीब के लिए बड़ी मुसीबत साबित होंगे. Lucknow Kanpur Expressway





