Manipur Crisis: फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद मणिपुर में फिर से भाजपा की गठबंधन सरकार बहाल हुई जिस में मैतेई समाज से आने वाले युमनाम खेमचंद सिंह मुख्यमंत्री बने और कुकी समाज के नेमचा किपगेन डिप्टी सीएम बनाए गए हैं. कुकी समुदाय ने इसे ‘धोखा’ माना क्योंकि वे मणिपुर को यूनियन टैरिटरी बनाने की मांग कर रहे हैं.

मणिपुर में कुकी समुदाय के लोग भाजपा की सरकार से नाराज हैं. भाजपा के खिलाफ कुकी समाज का यह असंतोष लंबे समय से चला आ रहा है. भाजपा ने मणिपुर में हमेशा मैतेई समाज के हितों के लिए काम किया जिस से कुकी समाज हाशिए पर चला गया. भाजपा शासन में ही मैतेई और कुकी के बीच जातीय हिंसा बढ़ी और इस हिंसा के दौरान सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण बना रहा.

2023 से मणिपुर की घाटियों में बसने वाले मैतेई समाज और पहाड़ों पर रहने वाले कुकी समुदाय के बीच हिंसा जारी है. कुकी समुदाय का आरोप है कि भाजपा सरकार, खासकर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, के नेतृत्व में कुकी जनजाति के खिलाफ मैतेई मिलिशिया ग्रुप्स को सपोर्ट मिला जिस से पूरे राज्य में कुकी लोगों के खिलाफ जुल्म बढ़े. सरकार ने हिंसा में कुकी लोगों की रक्षा नहीं की बल्कि मैतेई मिलिशिया का साथ दिया. कुकी संगठनों ने सरकार पर ‘एथनिक क्लीनजिंग’ का आरोप लगाया. सरकार के जरिए कुकी की ट्राइबल भूमि को जब्त करने की कोशिशें हुईं.

हाईकोर्ट ने 2023 में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) स्टेटस देने का फैसला किया जिस से कुकी समुदाय नाराज हुआ और हिंसा भड़की. कुकी समाज जल, जंगल और जमीन पर अपना अधिकार समझता है लेकिन शहरों में बसने वाले मैतेई समाज को एसटी का दर्जा मिल जाने से कुकी के लिए अपनी भूमि और संसाधनों पर खतरा मंडराने लगा. भाजपा सरकार ने मैतेई को एसटी का दर्जा दिए जाने का समर्थन किया जो कुकी के हितों के खिलाफ है.

म्यांमार से चिनकुकी शरणार्थियों को बीजेपी सरकार ने घुसपैठिया साबित किया और इसी बहाने कुकी की जमीनों को हथिया लिया. केंद्र सरकार मणिपुर मुद्दे पर चुप रही और हालात के बेकाबू होने तक बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया. इन्हीं सब कारणों से कुकी लोगों में भाजपा से भरोसा पूरी तरह उठ गया और अब मणिपुर में नई सरकार के गठन के बाद कुकी समुदाय एक बार फिर से ठगा हुआ महसूस कर रहा है. Manipur Crisis

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