आप के मुंह से अपने लिए बारबार मोटी भैंस का संबोधन सुन मैं अर्थी पर लेटीलेटी रो पड़ी थी, जी. फिर झटके से मेरी आंखें खुलीं तो मैं ने पाया कि मेरी पलकें सचमुच आंसुओं से भीगी हुई हैं.
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