बीते पलों को याद कर के कुसुम का दिल जल बिन मछली सा तड़पने लगा. आखिर वक्त ने कैसा पलटा खाया कि जो घर खुशियों के फूलों से महकता था उसी घर को छोड़ने को विवश हो गई कुसुम?
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