गुड्डी अपने सुख की खातिर अपनी ममता का गला घोंट देती है और मासूम बच्चों को छोड़ देती है एक आश्रम में. आश्रम की संचालिका सुमनलता कठोरहृदय गुड्डी को ऐसा सबक सिखाती हैं कि उस की सोई हुई ममता जाग उठती है.
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