जवानी की दहलीज पर पैर रखते ही मन सातवें आसमान पर जा पहुंचता है. सारी दुनिया रंगीन और मदभरी लगती है. मन का घोड़ा बेलगाम होने लगता है और मदहोशी में किसी की बात सुनना नहीं चाहता है. कुछ ऐसा ही माधुरी के साथ हो रहा था.
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