सोमेश में भावनाओं के बजाय अधिकार और मैं का जनून दिखा था शुभ्रा को. यहां तक कि उस का प्यार प्यार नहीं पागलपन था, यह बात शुभ्रा उस के साथ विवाह होने से पहले जान गई थी. सब जानते हुए भी क्या शुभ्रा ने सोमेश के साथ विवाह कर अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी?
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