दादीमां उम्र की उस दहलीज पर खड़ी थीं जहां उन की दुनिया थी. बस, अपनों का प्यार, पोतेपोती का दुलार. लेकिन ये सब होते हुए भी वे इन सब से दूर बैठी थीं वृद्धाश्रम में. आखिर क्या कहानी थी दादीमां की.
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