भारतीय क्रिकेट टीम का कोच बनना आसान काम नहीं है. बीसीसीआई ने कोच के लिए विज्ञापन दिया तो इस पद के लिए सरकारी नौकरियों के परीक्षार्थियों की तरह देशीविदेशी दिग्गजों की होड़ लग गई. हालांकि इस पद के लिए विदेशी कोच को तरजीह दी जाती रही है पर इस बार देशी दिग्गजों की होड़ लगी हुई है जिस में प्रमुख रूप से रवि शास्त्री, अनिल कुंबले, संदीप पाटिल, वेंकटेश प्रसाद, प्रवीण आमरे, लालचंद राजपूत और बलविंदर सिंह संधू हैं. देश व विदेश से बीसीसीआई के पास कुल 57 आवेदन आए हैं. उम्मीद की जा रही कि बीसीसीआई की अगली कार्यसमिति की बैठक में तय हो जाएगा कि टीम इंडिया का मुख्य कोच कौन होगा.

वैसे इशारोंइशारों में महेंद्र सिंह धौनी ने साफ कर दिया है कि कोच वही बने जो टीम और भारतीय संस्कृति को समझे. कोच को सभी खिलाडि़यों के साथ तालमेल बैठाना होता है और यह जगजाहिर है कि पिछले कुछ कोचों के साथ खिलाडि़यों का व्यवहार या यों कहें कि कोच खिलाडि़यों के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाए चाहे जौन राइट हों, ग्रेग चैपल या फिर डंकन फ्लेचर हों. कोच बौस की तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह खिलाडि़यों के साथ ट्रीट करे, इसलिए टीम की बेहतरी के लिए सही कोच का चयन अहम चुनौती होता है. हालांकि यह भी पक्का है कि बीसीसीआई में जिस की ज्यादा चलती है, कोच वही होगा.

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