Earthquake: 24 जून 2026 को आए भयंकर भूकंप ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रकृति सब के लिए एक जैसा व्यवहार करती है लेकिन आपदाओं में नुकसान का कारण इंसान की कमजोर तैयारियां होती हैं. जापान और वेनेजुएला में एक जैसा भूकंप आया. जापान में जानमाल का नुकसान बहुत कम हुआ लेकिन वेनेजुएला में वही भूकंप भयंकर तबाही का कारण बन गया. पूरा इलाका बरबाद हो गया, इमारतें धड़ाम से गिर गईं, सड़कें टूट गईं और लाखों लोगों की जिंदगियां तबाह हो गईं.

जापान में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल होता है. इमारतें हिलती हैं लेकिन गिरती नहीं. मजबूत स्टील, सही डिजाइन और सख्त नियमों का पालन किया जाता है. इंजीनियरिंग की अच्छी क्वालिटी और सरकार की सख्त निगरानी ने वहां इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है जिस से भयंकर भूकंप में भी इमारतें खड़ी रहती हैं.

दूसरी ओर वेनेजुएला में इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत बेहद खराब थी. घटिया सामग्री, बिना प्लानिंग के निर्माण और भ्रष्टाचार ने इमारतों को कमजोर बना दिया. नतीजा यह हुआ की भूकंप के एक ही झटके में सैकड़ों इमारतें ढह गईं. इस से यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर कितना जरूरी है?

भारत भी भूकंप वाले जोन में आता है. दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी, कोलकाता जैसे कई बड़े शहर भूकंप के खतरे में हैं. सवाल यह है कि अगर भारत में ऐसा भयंकर भूकंप आया तो क्या होगा? दुख की बात यह है कि भारत घटिया निर्माण में सब से आगे है. सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में तो सब से ज्यादा लापरवाही और भ्रष्टाचार होता है. ठेकेदार सस्ता सामान लगाते हैं, मिट्टी की बजाय रेत मिला कर सीमेंट बनाते हैं, सरिया कम लगाते हैं और बिना किसी जांच के इमारतें खड़ी कर देते हैं. स्कूल, अस्पताल, सरकारी दफ्तर और आवास हर जगह यही हाल है.

बीजेपी सरकार पिछले कई सालों से विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का ढिंढोरा पीटती है. सड़कें, पुल, मेट्रो, हवाई अड्डे हर जगह बड़ेबड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं लेकिन क्वालिटी की पोल लगातार खुलती रहती है. कहीं नए बने पुल धड़ाम से गिरते हैं, कहीं नई बनी सड़कें पहली बारिश में नंगी हो जाती हैं तो कहीं नई बनी बिल्डिंग की छत टपकने लगती है. ठेकेदारों और अधिकारियों के गठजोड़ से घटिया काम पास हो जाता है. भ्रष्टाचार के कारण नियमों का पालन नहीं होता. भूकंपरोधी मानकों की अनदेखी होती है. गरीबों के लिए बनाए गए आवास इतने कमजोर होते हैं कि हल्की सी हवा में भी गिरने का खतरा होता है.

सरकार बड़ेबड़े दावे करती है लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है. जापान जैसे देश अपनी तैयारी से भूकंप से भी बच सकते हैं लेकिन भारत के पास फिलहाल ऐसी कोई तैयारी नजर नहीं आती. ऐसा भूकंप आने से पहले इस से बचने के कोई ठोस नीति बनाने की बजाय हमारी सरकार केवल “राहत पैकेज” और “मुआवजे” की घोषणा के लिए तैयार है. तबाही रोकने की बजाय तबाही के बाद रोनेधोने से क्या फायदा?

अगर आज हम ने इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाला भूकंप भारत में वेनेजुएला से भी ज्यादा तबाही मचा सकता है. हजारों स्कूल, अस्पताल और घर एक साथ ढह सकते हैं. शहर के शहर मिट्टी में मिल जाएंगे. लाखों निर्दोष लोग मारे जाएंगे. भूकंप प्रकृति का हिस्सा है लेकिन तबाही इंसानी लापरवाही से होती है. इस भूकंप में जापान ने साबित किया है कि तैयारी से बचाव संभव है और वेनेजुएला ने दिखाया है कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ती है. भारत को वेनेजुएला नहीं बनना है. Earthquake

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