प्रधानमंत्री के योगा इवेंट के लिये लाई गई ‘योगा मैट’ वैसे तो हर प्रतिभागी को मुफ्त में अपने साथ ले जानी थी. प्रधानमंत्री के योग में हिस्सा लेने वालों का जो अनुमान उत्तर प्रदेश की सरकार और जिला प्रशासन से लगाया था उससे कम लोगों ने योग में हिस्सा लिया. जिससे तमाम लोगों के लिये लाई गई योगा मैट खाली रह गई. बरसात से बचने के लिये पहले योग करने आये लोगों ने योगा मैट को अपने सिर पर रखकर पानी का बचाव करने के लिये प्रयोग किया. जब वह घर वापस जाने लगे तो अपने साथ एक ही नही कई कई मैट ले जाने लगे. जिसके हाथ जितनी मैट मिली वह उतनी ही लेकर जाने लगा. केवल योग करने गये लोग ही योगा मैट नहीं ले जा रहे थे वहां तैनात सुरक्षा कर्मी भी हाथ साफ करने में पीछे नहीं रहे.

सिंथेटिंक रबर से बनी योगा मैट की खरीद एलडीए यानि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 193 रूपये में की थी.प्रशासन को पता था कि योग मैट को वापस लेना संभव नहीं है ऐसे में योग करने वालों को एक मैट अपने साथ ले जाने की इजाजत थी. जिस संख्या में योग मैट बिछाई गई थी उस संख्या में लोग वहां आये नहीं, जिससे खाली पड़ी मैट को लोग अपने साथ लेकर जाने लगे. जब इस बात की जानकारी प्रशासन को हुई तो गेट पर तलाशी शुरू हो गई. जिसमें कई लोगों के पास योग मैट एक से अधिक मिली. प्रशासन ने एक अधिक मैट ले जाने वालों को मैट वहीं छोड कर जाने को कहा.

तब पता चला कि एक एक के पास 20 से 25 मैट का बंडल मिला. लोगों ने जब गेट के पास मैट छोड दी तो वहां मैट का ढेर लग गया. पता चला बाद में यह मैट दूसरे कई लोग उठा कर ले गये. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के योग शिविर में जिस तरह से योग मैट की लूट मची, उसी तरह कुछ समय पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सभाओं से चारपाई यानि खाट की लूट हो गई थी. इससे साफ लगता है कि लोग किसी भी वर्ग के हो वह अपनी आदत से बाज नहीं आ सकते. लोग बातें भले ही बड़ी बड़ी कर लें, पर असल में वह अपनी मानसिकता नहीं छोड़ सकते. मंदिर जाने वाले तक चप्पल की चोरी करने से बाज नहीं आते. ऐसे में बदलाव की उम्मीद करना उचित नहीं है.