लेखक- डा. अलका जैन 'आराधना'

अवनि को कालेज के लिए तैयार होते देख मां ने पूछा, "क्या बात है अवनि, आजकल कुछ उदास सी रहती हो? और यह क्या, आज फिर वही कुरता पहन लिया?" अवनि रोंआसी हो कर बोली, "अभी क्लासेज तो हो नहीं रहीं, सिर्फ गाइड ढूंढने की मशक्कत कर रही हूं."

मम्मी ने उस के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, "फिर भी सलीके से तैयार होना जरूरी है. मैं चेहरे पर मेकअप की परतें चढ़ाने को थोड़ी कह रही हूं."

अवनि ने कहा, “ठीक है मम्मी, आगे से ध्यान रखूंगी." मम्मी अवनि को जाते हुए देखती रही.डिपार्टमेंट में अवनि को उस की खास सहेली ईशा मिल गई जो पीएचडी की 2 साल की प्रोग्रैस रिपोर्ट सब्मिट कराने आई थी. ईशा ने अवनि से कहा, "हम दोनों ने एकसाथ गाइड ढूंढना शुरू किया था, देख मुझे 2 साल हो गए रजिस्ट्रेशन करवाए हुए, तेरी गाड़ी कहां अटक रही है?" अवनि का जवाब सुने बिना ही उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए ईशा आगे बोली, "यह क्या हाल बना रखा है...ढीला सा कुरता, तेल से चिपके बाल... यहां सारे लैक्चरर्स पुरुष हैं, मैडम. ऐसे ही नहीं मिल जाएंगे गाइड तुम्हें." अवनि रोंआसी हो कर बोली, "सुबह मम्मी भी मुझे सलीके से रहने को कह रही थीं और अब तुम भी."

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ईशा ने उसे समझाते हुए कहा, "मैं तुम्हें 50 वर्ष की उम्र पार किए प्रोफैसर्स पर लाइन मारने को नहीं कह रही, लेकिन पुरुष चाहे 18 का हो या 80 का, सुंदरता उसे आकर्षित करती ही है."

अवनि ईशा की बात समझने की कोशिश कर रही थी, फिर सोचने लगी, ‘सही ही तो कह रही है ईशा... मुझे अपने पहनावे और लुक्स पर ध्यान देना ही होगा. कल को जौब के लिए और शादी के लिए भी मेरे लुक्स को ही देखा जाएगा.’

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