बाहर से सख्त दिखने वाली, रूल्सरैगुलेशन को मानने वाली स्मिता के पीजी की मालकिन शोभा आंटी किसी पर विश्वास नहीं करती थीं. फिर ऐसा क्या हुआ कि वे स्मिता की शोभा मम्मी बन गईं?

मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर लोगों की भीड़ कंचेगोटियों सी  प्रतीत हो रही थी. लग रहा था जैसे किसी बच्चे के हाथ से ढेर सारे कंचे छूट कर चारों ओर बिखर गए हों. इतनी भीड़ स्मिता ने सिर्फ फिल्म के परदे पर देखी थी. उस के अपने शहर जबलपुर में तो शायद कुल मिला कर इतने ही लोग होंगे जितने यहां स्टेशन पर.

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