‘‘खूबसूरत शब्दों का जामा पहना देने से अश्लील शील नहीं हो जाता. बुरा, अच्छा नहीं हो जाता है. अधर्म, धर्म नहीं हो जाता. द्रौपदी के 5 विवाह किसी भी कारण से हुए हों, किसी का वचन, देवताओं का श्राप और पांडवों के प्रति द्रौपदी की ईमानदारी, लेकिन अधर्म वह फिर भी था. उस काल में भी, इस काल में भी.

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