हरीश अपने बनाए स्कैच में रंग भर रहा था. रविंद्र बैठा गिटार के तार कस रहा था कि तभी विकास आया और बोला, ‘‘यार रविंद्र, मैं अभीअभी नारायण के घर से आ रहा हूं. उस के पापा पहली तारीख को कंपनी के दौरे पर हिमाचल जा रहे हैं. वे नारायण को साथ चलने को कह रहे थे, लेकिन उस ने मना कर दिया जबकि उन की कंपनी की गाड़ी खाली जाएगी. क्यों न हम उस के पापा के साथ चले जाएं. बड़े दिनों से मन था चंडीगढ़ घूमने का. तू लगा न जुगाड़ उस के पापा से.’’

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