उम्र के 50 सावन पार करने के बाद सीता ने घर की देहरी पार कर दी थी. बेटे, बहुओं, पोतों को छोड़ा था. लेकिन सुब्बम्मा के विचारों ने उसे ऐसा सहारा दिया कि वह अपने को ‘सांझ का भूला’ समझने लगी. आखिर हुआ क्या था? 
अनलिमिटेड कहानियां आर्टिकल पढ़ने के लिए आज ही सब्सक्राइब करेंSubscribe Now