‘‘प्रियविभोर,

‘‘शुभाशीष,

‘‘जब तुम्हें मेरा यह पत्र मिलेगा तो तुम्हें हैरानी अवश्य होगी कि मुझे अचानक क्या हो गया जो मैं ने तुम्हे यह पत्र भेजा है, जबकि रोज ही तो हम दोनों की बात फोन पर होती और समय मिलने पर तुम वैबकैम पर भी मुझ से बात कर लेते हो. फिर ई मेल और व्हाट्सऐप के इस जमाने में पत्र लिखता ही कौन है. चैट करना आसान है. इसलिए तुम्हारे चेहरे पर आए आश्चर्य के भावों को बिना देखे भी मैं महसूस कर पा रही हूं.

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