आज 8 नवंबर, 2017 है. मुग्धा औफिस नहीं गई. मन नहीं हुआ. बस, यों ही. अपने फ्लैट की बालकनी से बाहर देखते हुए एक जनसैलाब सा दिखता है मुग्धा को. पर उस के मन में तो एक स्थायी सा अकेलापन बस गया है जिसे मुंबई की दिनभर की चहलपहल, रोशनीभरी रातें भी खत्म नहीं कर पातीं. कहने के लिए तो मुंबई रोमांच, ग्लैमर, फैशन, हमेशा शान वाली जगह समझी जाती है पर मुग्धा को यहां बहुत अकेलापन महसूस होता है.

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