रात साढ़े 10 बजे मैं सोने की तैयारी कर रही थी कि पार्थ आया और मेरे व अनिल के बीच में आ कर लेट गया. अनिल ने हंसते हुए उसे छेड़ा, ‘‘तुम्हें सारा दिन टाइम नहीं मिला क्या, जो इस समय अपनी मम्मी की नींद खराब कर रहे हो?’’ पार्थ ने फौरन जवाब दिया, ‘‘मेरी मरजी. मेरी मां है. मेरा जब मन होगा उन के पास आऊंगा. ठीक है न, मम्मी?’’

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