‘‘हैलो, क्या हाल है गौरव, मैं बोल रहा हूं, मोहित. क्या तैयारियां हैं इस बार...’’

‘‘तैयारियां पूरी हैं, इस बार विनोद के फार्म हाउस पर बैठेंगे, 20 की रात से.’’

‘‘और बाकी सब...’’

‘‘अरे टैंशन मत लो यार, सारे इंतजाम हो जाएंगे. विनोद को तो तुम जानते ही हो, खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ता. तुम तो बस बैंक से सौसौ के नोटों की दोचार गड्डियां निकाल लो. पिछले साल का हिसाब बराबर करना है. पक्की टौप राउंड ब्लाइंड में निकाल कर एक दांव में ही 6 हजार रुपए झटक ले गए थे.’’

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