उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद-भदोही जिले की सीमा पर स्थित दुर्गागंज थाना क्षेत्र का एक गांव है कुढ़वा. इस गांव के  कुछ लोग 15 जून की सुबह के समय अपने खेतों की तरफ जा रहे थे कि किसी की नजर नहर पर बनी पुलिया के नीचे चली गई. पुलिया के नीचे औंधे मुंह एक लाश पड़ी थी. उसे देख कर ही लोग वहां जमा होने लगे.

कुछ ही देर में यह बात गांव में फैली तो गांव से भी तमाम लोग लाश देखने के लिए उस पुलिया के नजदीक पहुंच गए. लाश पुलिया के पास की झाडि़यों में पड़ी थी. इस बीच किसी ने फोन कर के इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी.

थाना दुर्गागंज के थानाप्रभारी छविनाथ सिंह को पुलिस कंट्रोल रूम से नहर की पुलिया के नीचे लाश पड़ी होने की सूचना मिली तो वह बिना देर किए पुलिस टीम के साथ मौके की ओर रवाना हो गए. जब वह पुलिया के पास पहुंचे तो वहां लोगों की अच्छीखासी भीड़ थी, जिन में महिलाओं से ले कर बड़ेबूढ़े और बच्चे भी शामिल थे.

सभी लाश को ले कर तरहतरह की चर्चा में मशगूल थे. पुलिस को देख सभी पुलिया से कुछ दूर हो लिए. थानाप्रभारी ने सीधे नहर के पास जा कर पुलिया के नीचे देखा तो पता चला कि लाश किसी युवक की थी. आसपास का निरीक्षण कर के थानाप्रभारी को पता चल गया कि कहीं और हत्या करने के बाद लाश को यहां फेंका गया है.

बहरहाल, उन्होंने युवक की लाश पुलिया के नीचे से निकलवा कर मुआयना किया. मृतक का गला किसी धारदार हथियार से कटा हुआ था. घाव देख कर लग रहा था कि उस की हत्या कुछ समय पहले ही की गई थी.

थानाप्रभारी ने मौके पर मौजूद लोगों से जब उस की शिनाख्त करानी चाही तो सभी ने युवक को पहचानने से इनकार कर दिया. थानाप्रभारी ने लाश मिलने की सूचना एसपी और सीओ (भदोही) को भी दे दी.

पुलिस को मौके से कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला, जिस से युवक की पहचान हो सके. खोजी कुत्ता भी लाश सूंघने के बाद इधरउधर घूम कर वापस लौट आया. संभवत: घटनास्थल पर लोगों की आवाजाही होने की वजह से सबूत नष्ट हो गए थे.

बहरहाल, थानाप्रभारी छविनाथ सिंह ने मौके की काररवाई पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. उसी समय एसपी सचिंद्र पटेल और सीओ अभिषेक पांडेय भी मौके पर पहुंच गए. एसपी ने वहां मौजूद लोगों से मृतक के बारे में पूछताछ की. लेकिन उस के बारे में कोई कुछ भी नहीं बता सका.

एसपी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उसी समय सीओ (भदोही) अभिषेक पांडेय के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी. इस के अलावा उन्होंने स्वाट टीम के प्रभारी अजय सिंह को भी इस केस को खोलने में लगा दिया.

यह केस पुलिस टीम के लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं था क्योंकि घटनास्थल पर कोई ऐसा तथ्य नहीं मिला था, जिस से पुलिस को कुछ मदद मिल सके. पुलिस ने मुखबिर भी लगा रखे थे लेकिन उन की भागदौड़ भी बेकार साबित हुई. फिर भी पुलिस टीम इस केस को फाइलों में न दबा कर तफ्तीश में जुटी रही.

थानाप्रभारी छविनाथ सिंह को लग रहा था कि मृतक कहीं दूसरी जगह का रहा होगा और उस की हत्या कहीं दूसरी जगह कर के लाश यहां फेंकी गई है. मन में यह बात आते ही उन्होंने अपने कुछ मुखबिरों को पड़ोसी जिले इलाहाबाद के क्षेत्रों में भी टोह लेने को कह दिया. उन की यह मेहनत रंग लाई.

उधर इस घटना के खुलासे में जुटी स्वाट टीम भी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बड़ी बारीकी से जांच कर रही थी. टीम को कुछ सबूत भी हाथ लगे. उन सबूतों के आधार पर पुलिस के कदम केस के खुलासे की दिशा में बढ़े, तो सफलता मिल ही गई. मृतक की शिनाख्त हो गई. पता चला कि मृतक का नाम हजारी सरोज उर्फ रवि है और वह अवरता चेरिया, सैदाबाद, थाना हंडिया, जिला इलाहाबाद का रहने वाला था.

शिनाख्त होने के बाद स्वाट टीम व दुर्गागंज पुलिस की टीम ने घटना से जुड़े तमाम पहलुओं और साक्ष्यों के आधार पर खोजबीन की.

जांच में पता चला कि रवि की हत्या में उस की पत्नी समेत 6 अन्य लोग शामिल थे, जो आपस में अच्छे दोस्त थे और आर्केस्ट्रा पार्टी में काम करते थे. पुलिस टीम के लिए इतनी जानकारी काफी थी, सो पुलिस ने सभी आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.

इस का नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने 25 जुलाई, 2018 की रात कुढ़वा तालाब मसूदी के पास से रवि की पत्नी मंजू समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि 2 आरोपी फरार हो गए.
अभियुक्तों को हिरासत में लेने के बाद जब उन से पूछताछ शुरू की तो हजारी सरोज की हत्या की चौंकाने वाली कहानी सामने आई.

हजारी सरोज उर्फ रवि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के अवरता चेरिया गांव में रहता था. उस के पिता समरजीत मेहनतमजदूरी कर के अपने परिवार की गुजरबसर कर रहे थे. रवि के गांव में मंजू नाम की एक महिला रहती थी, जिस के पति रामपाल की 5 साल पहले मौत हो गई थी. 3 बच्चों की मां मंजू गठीले बदन की होने के साथसाथ अच्छे नाकनक्श वाली थी. 3 बच्चों की मां बनने के बाद भी उसे देख कर कोई नहीं कह सकता था कि वह 3 बच्चों की मां है.

मंजू गांव में विधवा के रूप में रह रही थी. इसी बीच उस के नैन रवि से लड़ गए और दोनों साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा कर साथसाथ रहने लगे. कुछ दिनों के बाद दोनों ने इलाहाबाद जा कर कोर्टमैरिज कर ली.

रवि से विवाह के पहले से ही मंजू का प्रेम संबंध कटहरा निवासी राजू सरोज के साथ चल रहा था, जो रवि का दोस्त था. राजू और मंजू के संबंधों की जानकारी रवि को नहीं थी.इधर रवि और मंजू की शादी से खार खाए गांव और घर के लोगों ने रवि और मंजू को गांवघर से बाहर कर दिया. ऐसे में रवि अपने दोस्त राजू सरोज के यहां आ कर रहने लगा था. पत्नी मंजू और उस के बच्चों की वजह से रवि की जिम्मेदारी बढ़ गई थी, इसलिए रवि मंजू के साथ एक आर्केस्ट्रा में काम करने लगा.
कहते हैं कि औरत जब चरित्रहीनता पर आमादा हो जाती है तो उसे किसी लोकलाज का डर नहीं रहता. मंजू भी ऐसी ही औरत थी. रवि से विवाह कर लेने के बाद भी उस के संबंध राजू सरोज से बने रहे, जिस की भनक बाद में रवि को लग गई थी.

वह मंजू को ले कर सूरज, गुजरात जाने की बात करने लगा था. जब इस की जानकारी राजू को हुई तो उसे लगने लगा कि उस की प्रेमिका अब उस से दूर हो जाएगी. वह रवि को सूरत जाने से रोकने के प्रयास में लग गया.

सब से पहले उस ने मंजू को मनाते हुए कहा, ‘‘रानी, तुम सूरत चली जाओगी तो मैं कैसे रहूंगा. क्या तुम ने कभी इस बारे में सोचा है?’’

उसे एकटक देखते हुए मंजू बोली, ‘‘राजू, मैं कर भी क्या सकती हूं. मैं ने रवि से शादी की है, वह मुझे जहां ले कर जाएगा वहां जाना ही पड़ेगा.’’

इसी के साथ मंजू ने एक चौंकाने वाली बात कह डाली. वह बोली, ‘‘राजू, रवि के रहते मुझे उस की बात माननी ही पड़ेगी. हां, अगर वह नहीं रहेगा तो मैं तुम्हारे साथ हमेशा के लिए रह सकती हूं.’’
उस का इतना कहना मात्र था कि राजू ने मन ही मन एक फैसला ले लिया और मंजू से बोला, ‘‘घबराओ मत मंजू, मैं अपनी राह का कांटा ही हटा दूंगा. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी.’’

मंजू से बात कर के राजू ने रवि को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. इस योजना को अंजाम देने के लिए राजू सरोज ने मंजू सहित अपने 5 साथियों को शामिल किया जो दूसरे आर्केस्ट्रा में काम किया करते थे.

तय योजना के मुताबिक 14 जून, 2018 को राजू सरोज रवि को गांव से गई बारात में नउआपुर ले गया, जहां उस ने भोला यादव की बोलेरो से अपने साथियों को भी बारात में बुला लिया था.
बारात में सब एक जगह एकत्र हुए तो उन्होंने बारात का खाना खाने के बजाए चिकन खाने की योजना बनाई. राजू सरोज ने सभी के साथ रवि को भी बोलेरो में बिठा लिया. रास्ते में राजू ने पहले साथ लाए देसी तमंचे की बट से रवि के सिर पर 2 बार प्रहार किए और उसे दबोच लिया. फिर उस की गरदन में गमछे का फंदा बना कर उस का गला घोंट दिया. इस के बाद भी जब रवि नहीं मरा तो सर्जिकल ब्लेड, जो राजू साथ ले कर आया था, से उस का गला काट दिया, जिस से उस की मौत हो गई. इस के बाद उस की लाश को जिले की सीमा से बाहर भदोही जिले के दुर्गागंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव कुढ़वा की पुलिया के नीचे छिपा कर सब वापस लौट आए.

रास्ते में सभी ने अपने उन कपड़ों को जला दिया, जिन में खून के छींटे लगे थे. इस के बाद उन्होंने गाड़ी को अच्छी तरह से धो कर खून साफ कर दिया ताकि कहीं से भी हत्या का पता न लग पाए. चूंकि रवि का गांवघर से नाता नहीं था, इसलिए उस के लापता होने के बाद किसी ने उस की खोजखबर नहीं ली थी, जिस से हत्यारे बचते रहे.

पुलिस पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्तों ने बताया कि रवि की हत्या के बाद सभी मिल कर राजू और मंजू को भगाने की फिराक में थे, क्योंकि राजू के भाग जाने पर कोई उन्हें न तो पकड़ पाता और न ही कोई उन पर शक करता. अभी वे ऐसा करने वाले ही थे कि पुलिस टोह लेती हुई उन तक पहुंच गई.

पुलिस ने रवि की हत्या के आरोप में उस की पत्नी मंजू, मंजू के प्रेमी राजू सरोज तथा उन के साथियों महीपाल, रामफेर और बुझावन को गिरफ्तार कर उन के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया.

ये सभी इलाहाबाद के गांव सराय ममरेज के रहने वाले थे. इस मामले में पुलिस को 2 अन्य आरोपियों की अभी भी तलाश है, जिन का घटना में शामिल होना बताया जा रहा है.
इस पूरे प्रकरण में मृतक की शिनाख्त सब से टेढ़ी खीर थी, क्योंकि मृतक सैदाबाद, हंडिया का रहने वाला था तो अभियुक्त सराय ममरेज का और लाश मिली थी दुर्गागंज में. एसपी सचिंद्र पटेल ने इस केस को सुलझाने वाली टीम को 10 हजार रुपए नकद पुरस्कार दिया. कहानी लिखे जाने तक इस मामले में जेल भेजे गए अभियुक्तों की जमानत नहीं हो सकी थी ?

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं.

Tags:
COMMENT