पैसा और समय बचाने के चक्कर में लोग माहिर डाक्टर के पास जाने के बजाय सड़कछाप झोलाछाप डाक्टर से इलाज कराना ज्यादा बेहतर मानते हैं और अपनी जान का जोखिम लेने को भी तैयार हो जाते हैं. ऐसे लोग सड़क किनारे फुटपाथ पर ही तंबू तान कर बड़ा सा बैनर लटका कर बैठ जाते हैं. वहां हर तरह के मर्ज का इलाज करने का दावा किया जाता है. इन की मंसा पैसा ऐंठने की ज्यादा होती है. ये लोग ज्यादा पढ़ेलिखे भी नहीं होते हैं, पर इन के पास बड़ेबड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाए गए होते हैं और दावा करते हैं कि ये लोग भी इन के पास इलाज कराने के लिए आया करते थे.

सड़क के किनारे एक ओर बैठ कर हर समस्या का समाधान करनेे का दावा करने वाले ठग बाबा की सलाह कभीकभार लोगों को इतनी भारी पड़ती है कि मरीज की जान के लाले पड़ जाते हैं. आखिर में थकहार कर इन्हें बड़े अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है.

पेट साफ न होने की शिकायत पर 2 नौजवान माहिर डाक्टर के बजाय एक फुटपाथिया अंगूठाटेक बाबा के पास चले गए. ठग बाबा ने उन्हें सलाह देते हुए कहा कि वे गले तक टूथब्रश से सफाई करें. इस से मुंह के साथ पेट भी साफ हो जाएगा.

जब इन नौजवानों ने ऐसा किया तो ब्रश पेट के अंदर चला गया. नौबत आंतें फटने तक की आ गई. जब इन की हालत ज्यादा बिगडऩे लगी तो दोनों को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भरती कराया गया.

एक शख्स उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला गौरव है. गौरव को अक्तूबर, 2018 में एम्स में भरती कराया गया वहीं दिल्ली के रहने वाले आबिद को एम्स के आपातकालीन विभाग में दिसंबर, 2018 में भरती कराया गया.

दोनों अलगअलग शहर से हैं, लेकिन समस्या एक जैसी थी. उन की आहार नली के रास्ते टूथब्रश उन के पेट में चला गया था. इस की वजह से दोनों को खानेपीने में बहुत परेशानी हो रही थी. दोनों का सिटी स्कैन हुआ तो पता चला कि पेट में ब्रश अटका हुआ था. इस के बाद डाक्टरों ने एंडोस्कोपी से ब्रश निकालने की कोशिश की, पर ब्रश आड़ा हो गया. इस के बाद गैस्ट्रोइंट्रोलौजी विभाग के डाक्टरों की मदद ली गई तब जा कर कहीं ब्रश निकाला जा सका.

इन दोनों नौजवानों ने तो समय रहते अपना इलाज करा लिया और काफी मशक्कत के बाद जान बच सकी, पर आजकल लोग इन बाबाओं के झांसे आ कर कुछ भी करगुजरने को तैयार हो जाते हैं, वहीं लड़कियां भी स्लिम यानी छरहरी होने के लिए खाना खा कर उलटी कर देती हैं. ये लड़कियां उलटी करने के लिए ब्रश के पिछले हिस्से को गले में डालती हैं और इसी क्रम में ब्रश अंदर चला जाता है और जान जाने के लाले पडऩे पर अस्पताल की ओर रुख करना पड़ जाता है.

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