लगातार महंगी होती शिक्षा की समस्याओं के बीच एक विरोधाभासी तथ्य यह भी देखने को मिलता है कि हमारे देश में कई अभिभावक अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए उन विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए भेजते हैं जहां पढ़ाई भारत के मुकाबले 8 से 10 गुना तक महंगी है. यह तब है जब देश में मेक इन इंडिया जैसे महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है और हर चीज में स्वदेशी विकल्प को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है. इस विरोधाभासी तथ्य का खुलासा हाल में आर्थिक विश्लेषण संस्था एसोचैम ने अपने एक सर्वेक्षण के आधार पर किया है.  

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