सीलन भरे, दड़बेनुमा छोटेछोटे कमरे उन कमरों में 2-3 चौकियां, हवा आनेजाने के लिए ठीक से खिड़कियां तक नहीं, गंदे बाथरूम व टौयलेट, संकरी सीढि़यां, दीवारों और छतों से ढहते प्लास्टर, रंगरोगन का नामोनिशान नहीं, अंदर और जहांतहां बाहर बिजली के लटकते तार, पानी की तरह बेजायका चाय, गंदी पड़ी पानी की टंकियां, गेट पर लगा बड़ा सा फाटक और वहां पर सिक्योरिटी के नाम पर खड़ा बूढ़ा व कमजोर गार्ड. कुछ ऐसी है पटना के गर्ल्स होस्टल्स की पहचान. ज्यादातर गर्ल्स होस्टल्स की ऐसी हालत है कि बाहर से देखने पर अजीब सा रहस्यमयी वातावरण नजर आता है. टूटेफूटे पुराने मकानों के कमरों में लकड़ी या प्लाईबोर्ड से पार्टिशन कर के छोटेछोटे कमरों का रूप दे दिया गया है. सीलन भरे कमरों में न ही ढंग से रोशनी का इंतजाम है, न पानी और साफसफाई का. खानेपीने की व्यवस्था काफी लचर है.

Tags:
COMMENT