कहते हैं अब से कोई डेढ़ सौ साल पहले जब भोपाल में नबाबों का शासन था तब भोपाल रियासत में भयंकर सूखा पड़ा था, अच्छी बारिश के लिए तत्कालीन नवाब ने अच्छी वारिश के लिए किन्नरों से भुजरियों (कजलियाँ) का जुलूस निकालने की गुजारिश की थी, किन्नरों ने नबाब की गुजारिश पूरी करते यह जुलूस निकाला तो जोरदार वर्षा हुई. तब से रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरियों पर किन्नरों का जुलूस हर साल बदस्तूर निकलने की जो परम्परा पड़ी, वह आज तक कायम है. लेकिन वक्त के साथ साथ इस जुलूस का स्वरूप बदलता गया और आज हालत यह है कि इस जुलूस का पूरी तरह आधुनिकीकरण हो गया, जिसमें कुछ लोगों को फूहड़ता और अश्लीलता भी नजर आती है.

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