साल 2017. 31 जनवरी की सुबह. सूरज पूरी तरह नहीं निकला था. चारों ओर हलका अंधेरा था. तकरीबन 6 बजे राजरप्पा मंदिर का दरवाजा खुला. अपनेअपने हाथों में पूजा के थाल लिए लोग अंदर जाने लगे. एक नौजवान तड़के 5 बजे से ही मंदिर के बाहर खड़ा था. कुछ देर तक वह मंदिर के आसपास चक्कर लगाता रहा, उस के बाद पास की ही भैरवी नदी में नहाने लगा. नहाने के बाद वह नौजवान नए कपड़े पहन कर मंदिर के अंदर गया और काफी देर तक पूजापाठ करता रहा. उस के बाद उस ने 15 बार मंदिर के चक्कर लगाए, फिर वह धीमे कदमों से मंदिर से बाहर निकला और बलि वेदी के पास पहुंच गया. वहां जमीन पर बैठ कर वह कुछ देर तक इधरउधर देखता रहा.

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