ये 2 घटनाएं 2 देशों की हैं, पर आपस में जुड़ी हुई सी लगती हैं. पहली घटना अमेरिका की है. वहां के राष्ट्रपति बराक ओबामा एक थैंक्स गिविंग टर्की पार्डन प्रोग्राम में अपनी बेटियों-मालिया और साशा के साथ गए थे. 16 साल की मालिया और 13 साल की साशा ने शौर्ट स्कर्ट्स पहनी हुई थीं. यह देख कर रिपब्लिकन की प्रवक्ता ऐलिजाबैथ लौटन ने फेसबुक पर कमैंट किया कि मालिया और साशा को चाहिए कि वे थोड़ी सभ्य लोगों जैसी दिखें. जिस भूमिका में हो, उसे तो इज्जत दो. आप के मांबाप तो अपनी पोजिशन का बहुत ज्यादा सम्मान नहीं करते, इसलिए मुझे लगता है कि आप ने ‘गुड रोल मौडल’ में थोड़ी कसर छोड़ दी. कोई नहीं, थोड़ी कोशिश करो. मौके के हिसाब से दिखो. ऐसे कपड़ों में दिखो जिन में आप को सम्मान मिले, न कि यह लगे कि आप किसी बार में खड़ी हैं.

दूसरी घटना भारत की है. बौलीवुड और टैलीविजन कलाकार गौहर खान टैलीविजन के एक रिऐलिटी शो ‘रा स्टार’ के फिनाले की रिकौर्डिंग में शिरकत कर रही थीं कि वहां मौजूद एक नौजवान ने स्टेज पर चढ़ कर उन को थप्पड़ मार दिया. 24 साल के उस नौजवान मोहम्मद अकील मलिक को गौहर खान के कपड़ों को ले कर एतराज था. उस का मानना था कि एक मुसलिम होते हुए गौहर खान ने ऐसी बदनदिखाऊ ड्रैस क्यों पहनी हुई थी. ये दोनों खबरें अपनेअपने देश में मीडिया की सुर्खियां बनीं. टेनेसी के कांग्रेसमैन स्टीफन फिंशर की प्रवक्ता ऐलिजाबैथ लौटन को नौकरी से निकालने की मांग उठी, जबकि मोहम्मद अकील मलिक को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया. उसे अपने किए पर पछतावा नहीं था. उस का कहना था कि वह गौहर खान को समझाना चाहता था कि शौर्ट स्कर्ट पहनना इसलाम के खिलाफ है.

ये दोनों घटनाएं इस माने में भी आपस में जुड़ी हुई हैं कि किसी की बदतमीजी का शिकार हुई इन महिलाओं का समाज में एक खास मुकाम और रुतबा है. बराक ओबामा दुनिया के सब से ताकतवर नेता हैं और उन की बेटियों के पहनावे पर कमैंट करना सीधे उन को चुनौती देना है. वैसे, तसवीरों में देखने पर ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था कि मालिया या साशा ने भद्दे कपड़े पहन रखे थे. अमेरिका में इस उम्र की लड़कियों के लिए ऐसे कपड़े पहनना कोई हैरत की बात नहीं है, तभी तो ऐलिजाबैथ लौटन के बयान की सोशल साइटों पर फजीहत की गई.

इधर, गौहर खान ऐसी इंडस्ट्री से जुड़ी हुई हैं जिस पर ग्लैमरस होने का टैग लगा है. वहां फैशनेबल कपड़े पहनना कौन सी नई बात है. ऐसा भी नहीं है कि गौहर खान पहली मुसलिम हैं, जिन्होंने ऐसे पहनावे को अपनाया है. फिर वे जिस शो की ऐंकरिंग कर रही थीं, वहां उन्हें खुद को खूबसूरत दिखाना था. घटना के बाद खुद गौहर खान ने कहा कि वे दुखी और हैरान हैं, लेकिन इस घटना ने उन्हें और मजबूत बना दिया है. वह घटिया शख्स उन के धर्म या देश के नौजवानों की नुमाइंदगी नहीं करता है. गौहर खान वाले मामले में उन के खास दोस्त कुशाल टंडन ने कहा कि यह जो भी हुआ, बड़ा वाहियात था. उन्होंने शो की सिक्योरिटी की खामियों पर तो सवाल खड़ा किया ही, यह चिंता भी जताई कि अगर आरोपी के पास चाकू या तेजाब होता, तो क्या होता. इन 2 घटनाओं से उन आम औरतों या लड़कियों का दर्द समझा जा सकता है जिन पर सभ्यता या धर्म का नाम ले कर रोजाना जबान या हाथपैर या फिर हथियार से हमले किए जाते हैं, उन पर बेहूदा जुमले कसे जाते हैं, चाहे वे स्कूल की नाबालिग लड़कियां हों या सड़क पर पत्थर तोड़ती फटी साड़ी में कोई मजदूर औरत.

मर्दों के दबदबे वाले हमारे समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में उन के पहनावे को बहुत ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है. वे छोटे कपड़े पहनती हैं और पढ़ाईलिखाई की वजह से आजादखयाल हो गई हैं, लिहाजा, उन के मौडर्न रूप से मर्दों की मर्दानगी में जोश भर जाता है और वे उन्हें अपनी ज्यादती का शिकार बना डालते हैं. खाप पंचायतें और दूसरी धार्मिक संस्थाएं महिलाओं के पहनावे को ले कर फतवे जारी करती हैं. कहीं उन के जींस पहनने पर बैन लगाया जाता है तो कहीं उन के टीशर्ट या कमीज पहनने पर उंगली उठाई जाती है. सवाल उठता है कि महिलाओं के पहनावे की हद क्या होनी चाहिए? अगर किसी सिरफिरे को किसी औरत का साड़ी पहनना भी नागवार गुजरता है, तो क्या वह साड़ी बांधना बंद कर दे? मुसलिम औरतें तो बुरके में रहती हैं, फिर भी मनचलों की छेड़छाड़ का शिकार बनती हैं.

दरअसल, अपने मन की कुंठाओं को शांत करने के लिए लोग धर्म का सहारा ले कर महिलाओं पर बेवजह की पाबंदियां लगाने से बाज नहीं आते हैं. वे उन्हें खुद से नीचा दिखाने के बहाने ढूंढ़ते हैं, जिस में उन की देह पर निशाना लगाना उन के लिए सब से आसान तरीका होता है. बराक ओबामा की बेटियों से जुड़ा मामला राजनीति से प्रेरित था, तो गौहर खान को थप्पड़ मारने वाले नौजवान की यह दलील कि मुसलिम औरतों को उन हदों के अंदर रहना चाहिए, जो उन के लिए इसलाम ने तय की हैं, बचकाना और धर्म की आड़ में किया गया ऐसा अपराध है, जो माफी के लायक नहीं है.

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