‘कौन कहता है कि आसमान में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो...’ एक कविता की इन लाइनों को गुड्डू बाबा बिहार की राजधानी पटना में यथार्थ पर उतार रहे हैं. वे पूजापाठ वाले बाबा नहीं हैं, बल्कि उन की सफेद दाढ़ी और बालों की वजह से उन का घरेलू नाम गुड्डू ही गुड्डू बाबा के तौर पर मशहूर हो गया है. उन के नाम के साथ भले ही बाबा जुड़ा हुआ है लेकिन वे असल में ढोंगी बाबाओं की पोलपट्टी खोलने में लगे हुए हैं. वे गंगा नदी के साथसाथ उस से जुड़े पोंगापंथ की गंदगी को साफ करने और आबोहवा को बचाने की मुहिम में पिछले 17 सालों से दिनरात लगे हुए हैं.

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