यमन देश कभी अपने मसालों और खनिजों की भरमार के लिए दुनियाभर में मशहूर था, लेकिन 5,31,000 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश से जो सनसनीखेज खबर आई है उस ने सब को शर्मसार कर दिया है. यमन एक मुसलिम बहुल देश है. वहां के उत्तरपश्चिमी प्रांत हज्जा के मीडी शहर में रावान नाम की एक 8 साल की मासूम बच्ची की कुछ दिन पहले शादी हुई थी. रावान के पति की उम्र 40 साल थी. उस 40 साला हट्टेकट्टे शौहर ने सुहागरात पर बेहद खौफनाक तरीके से उस के साथ बलात्कार किया, जिस से उस की मौत हो गई. औरतों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक शख्स ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि शादी की रात सैक्स के दौरान बच्ची का बहुत खून बहा और उस के नाजुक अंग को नुकसान पहुंचा, जिस से उस की दर्दनाक मौत हो गई. वे लोग उसे क्लिनिक ले गए, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

इस से भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि न तो रावान के घर वालों और न ही यमन के प्रशासन ने उस हत्यारे पर कोई कार्यवाही की, बल्कि लोकल प्रशासन और लोगों ने इस मामले पर परदा डालने की कोशिश की. वजह, मुसलिम देशों में न तो बाल विवाह अपराध?है और न ही बीवी के साथ बलात्कार करना गुनाह माना जाता है. वहां तो ऐसी खबरें छापने या दिखाने पर भी एक तरह से अघोषित बैन लगा हुआ है. वैसे, मामले के खुलासे के बाद कुछ लोगों ने दबी आवाज में इस वाकिए के खिलाफ आवाज उठाई है और हत्यारे पति को गिरफ्तार करने की मांग की है, पर कोई ठोस कार्यवाही होगी, इस में शक है. दरअसल, यमन के कबीलाई इलाकों में गरीबी के चलते लड़कियों की कम उम्र में शादी कर दी जाती है. एक सर्वे के मुताबिक, यमन की कुल औरतों में से एकचौथाई की शादी 15 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है.

लड़कियों की जल्दी शादी करने के पीछे ऐसा माना जाता है कि इस से वे अपने पति का हुक्म हमेशा मानती हैं, उन के खूब बच्चे होते हैं और वे बदचलन भी नहीं होती हैं. यमन में गरीबी के चलते भी लोग अपनी बच्चियों की कम उम्र में शादी कर देते हैं, जिस से उन के पालनेपोसने पर होने वाला खर्च बच जाए. संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट से इस देश की गरीबी का पता चलता है. तकरीबन ढाई करोड़ की आबादी वाले यमन में तकरीबन एक करोड़ लोग ऐसे हैं जो भुखमरी के शिकार हैं, जबकि 1 करोड़ 30 लाख लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी है.

अगर कानून की बात करें, तो पहले यमन में लड़कियों की शादी की उम्र कम से कम 15 साल तय की गई थी, लेकिन 90 के दशक में देश की संसद ने यह कह कर इस कानून को रद्द कर दिया था कि मांबाप ही तय करेंगे कि वे अपनी बेटी की शादी कब करें, सरकार नहीं. सांसदों ने तो इस जिम्मेदारी से छुटकारा पा लिया लेकिन मानवाधिकार संगठनों ने दिसंबर 2011 में यमन की सरकार से गुजारिश की थी कि वह 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी पर बैन लगा दे, क्योंकि इस के चलते उन की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है और उन की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इस मुद्दे पर अभी बातचीत चल ही रही थी कि राजनीतिक उठापटक के बीच वह बीच में ही रुक गई.

औरतों की जिंदगी बदहाल

संयुक्त राष्ट्र संघ के आंकड़ों के मुताबिक, मुसलिम देशों में औरतें सब से ज्यादा बदहाल जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं. लेकिन वहां उन से जुड़ी ऐसी खबरों को दबा दिया जाता है या सिरे से नकार दिया जाता है. देखा जाए तो इसलाम धर्म के मुताबिक मुसलिम विवाह समझौते पर टिका है. मर्द 4-4 शादी कर सकते हैं. वे एकसाथ 4 बीवियां रख सकते हैं. उन्हें आसानी से तलाक दे सकते हैं, जिस के लिए उन्हें सिर्फ 3 बार ‘तलाक’ कहना होता है. शादी के समय मेहर की रकम तय होती है, जिस के मुताबिक अगर पति तलाक देता है या किसी वजह से अपनी पत्नी को छोड़ता है, तो मेहर की रकम उसे अपनी पत्नी को देनी होती है. ज्यादातर मामलों में मेहर की रकम बेहद कम होती है.

विवाह के यही एकतरफा समझौते औरतों को कमजोर बनाते हैं, उन्हें दासी की तरह जिंदगी जीने को मजबूर करते हैं. मान लीजिए, अगर सैक्स के दौरान रावान की मौत नहीं हुई होती, तो वह उस के बाद रोजाना वही जख्म खाने को मजबूर होती. उस का पति हर रोज उस के साथ वही दरिंदगी करता जिस के चलते उस की दर्दनाक मौत हो गई.

रावान के पति का तो अब भी शायद ही कुछ बिगड़े. वह कुछ दिनों में दूसरी बीवी ले आएगा, शायद रावान की उम्र की ही. पर इस सब में पिसती तो मासूम बच्चियां ही हैं. अगर कच्चे घड़े में ठंडा पानी भर दो तो वह भी उस घड़े को गला देता है. रावान के पति ने तो उस मासूम कली को वासना की धधकती आग से भर दिया था, जिस का नतीजा सब के सामने है.

बाल विवाह के कड़वे सच

*      दुनियाभर में तकरीबन 70 करोड़ ऐसी औरतें हैं जिन की शादी 18 साल से कम उम्र में हो गई थी. तकरीबन 25 करोड़ औरतों की 15 साल से भी पहले.

*      यूनिसेफ की लिस्ट में बंगलादेश का नंबर चौथा है और भारत का 12वां. भारत में बाल विवाह गैरकानूनी होने के बावजूद लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है.

*      आज भी भारत के कई राज्यों में होने वाली शादियां तय बचपन में हो जाती हैं, हालांकि लड़कियों का गौना बाद में होता है.

*      अफ्रीकी देशों में तो गरीबी के चलते अकसर लड़कियों की कम उम्र में शादी कर दी जाती है, वह भी अपनी उम्र से दोगुनीतिगुनी उम्र के मर्द से.

*      जिन लड़कियों की बचपन में शादी हो जाती है, वे स्कूल नहीं जा पाती हैं. कम उम्र में बच्चा पेट में आ जाने से जचगी के दौरान होने वाली मुसीबतों के चलते वे अपनी और बच्चे की जान तक खो बैठती हैं.

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