यह वही दौर है जिस में सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ रही है. लोग स्वास्थ्य नियमों का पालन कर रहे हैं, कसरत कर रहे हैं. साफसफाई व स्वच्छता पर भी ध्यान दे रहे हैं और इन से ताल्लुक रखते उत्पादों का पहले से कहीं ज्यादा इस्तेमाल भी कर रहे हैं लेकिन ये सावधानियां बेफिक्री नहीं, एक झूठी तसल्ली भर देती हैं. वजह, हर चीज में मिलावट है जिस से बच पाना आसान नहीं. मिलावटखोरी कितने शबाब पर है, इस की गवाही विभिन्न एजेंसियों के आंकड़े भी देते हैं और सुप्रीम कोर्ट की यह तल्ख टिप्पणी भी कि दूध में मिलावट करने वालों को उम्रकैद की सजा होनी चाहिए.

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