होली का त्योहार मीठी शरारतों और उत्सव के माहौल में रम जाने का नाम है. इस दिन दोस्त और दुश्मन सारे गिलेशिकवे भूल कर रंगों की रंगोली के साथ रिश्ते की नई शुरुआत करते हैं. लेकिन जरा संभल कर, इस बार होली में जरूरत है सावधान रहने की. किस से और कैसे, बता रहे हैं आलोक सक्सेना.
होली के सतरंगी रंग प्रेम का आह्वान करते हैं और न सिर्फ उल्लास की मादकता को बढ़ाते हैं बल्कि उत्सव व उत्साह के माहौल को भी जन्म देते हैं. विभिन्न रंगों के रंग तथा अबीरगुलाल का इस्तेमाल कर के जब हम एकदूसरे को रंगते हैं तो हमें प्रसन्नता, मस्ती और आनंद के साथसाथ एक नया परिवर्तन भी दिखाई पड़ता है. विभिन्न रंगों से रंगेपुते चेहरे हमें प्रकृति के साथ रह कर हर हाल में जीने की प्रेरणा प्रदान करते हैं.
होली के रंगों में रंग कर कोई भी एक रंग का नहीं रहता. होली का त्योहार हम सब को थोड़ी सी आजादी दे कर एक नई दुनिया और नए अनुभव से रूबरू कराता है.
होली मीठी शरारतों में रम जाने का दूसरा नाम है. होली पर कोई भी मनुष्य किसी भी प्रकार की वर्जनाओं में नहीं बंधना चाहता. बूढ़ा भी बच्चा बन जाना चाहता है, जीभर मौजमस्ती करना चाहता है. वह भी थोड़ा सा उच्छृंखल हो कर किसी को भी रंगे बिना छोड़ना नहीं चाहता. एकदूसरे को गले लगा कर खुशियां बांटने और जीभर कर हंसनेहंसाने का त्योहार है होली. इसीलिए फगुनाई गीतों में कहा गया है कि होली पर, ‘देवर भी पी (पति) सा लागे...’
आजकल शहरों की होली को देख कर कहा जाने लगा है कि होली, बस 2 घंटे में हो ली. यह बात काफी हद तक सही है, फिर भी होली है तो ऐसे ही नहीं हो जाएगी. कुछ न कुछ रंग आप के ऊपर भी चढ़ेगा ही. होली के हर्ष, उल्लास के लिए यदि थोड़ीबहुत तैयारी पहले कर ली जाए तो होली का मजा 2 घंटे में ही ले कर रंग में भंग होने से बचा जा सकता है.
सलीके से खेलें
होली हो और शरारत न हो, ऐसा तो हो संभव ही नहीं है मगर शरारत भी यदि पूरी तरह मर्यादित हो तो होली का मजा अवश्य कई गुना बढ़ जाता है. लेकिन जरा सी लापरवाही से इस रंगीन त्योहार को बदरंग होने में देर भी नहीं लगती. इसलिए जरूरी है कि होली के अवसर पर आप जिसे भी रंग या अबीरगुलाल लगाएं उस के साथ जोरजबरदस्ती न करें. आपसी सौहार्द्र के साथ रंग लगाने का मजा लें.
होली के अवसर का मौका पा कर कुछ बाहरी शरारती लोग आप की अपनी टोली, अपार्टमैंट या फिर सोसायटी में भी घुस आते हैं. ऐसे लोगों पर आप की और आप के चौकीदार की चौकस नजर रहनी बहुत आवश्यक है वरना कहीं ऐसा न हो कि आप तो होली खेलने में मस्त रहें और कोई आप के फ्लैट में घुस कर आप के फ्रिज या टीवी के ऊपर रखी हुई घड़ी, टेबल पर रखा हुआ आप का लैपटौप या फिर डै्रसिंग टेबल पर रखे हुए कीमती कंगन, टौप्स या फिर आप का कोई अन्य कीमती सामान ही गायब कर जाए.
महिलाएं ऐसे किसी भी परिचित के साथ होली न खेलें जिन के चरित्र पर शक हो क्योंकि बदतमीजी भरी मानसिकता के व्यक्तियों के हाथ आप के शरीर के व्यक्तिगत अंगों पर फिसलते देर नहीं लगती. संभव हो तो इस बात की जानकारी अपने पति, जेठानी तथा सास को पहले से ही दे दें. इस प्रकार होली के दिन आप अपने अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा कर पाएंगी.
आप के महल्ले, अपार्टमैंट तथा सोसायटी के बच्चों को चाहिए कि वे आपसी सौहार्द्र की होली खेलें. गंदे पानी, कीचड़, कोलतार या फिर पत्थर आदि मारमार कर होली न खेलें यह बात आप को अपने आसपास के बच्चों को एकत्रित कर के पहले ही बता देनी चाहिए. लड़का हो या लड़की, एकदूसरे पर अबीरगुलाल लगा कर ही होली का रंग बरसाएं. मारपीट, छीनाझपटी तथा जोरजबरदस्ती किसी से भी न करें. बच्चों को चाहिए कि वे भी अपने घर तथा आसपास के बड़ेबुजुर्गों को शिष्टाचार के साथ रंग लगाएं तथा होली के मौके पर हैलोहाय के स्थान पर सभी बड़ों का हाथ जोड़ कर अभिनंदन जरूर करें.
होली के अवसर पर बच्चा हो या बूढ़ा, एकदूसरे के चेहरों पर रंग लगाने का अधिकार दोनों को है, इसलिए तनिक सा भी संकोच न करें. लेकिन ध्यान रखें रंगों के बहाने किसी से भी बदतमीजी तथा छेड़छाड़ करने की इजाजत किसी को भी नहीं है.
सभ्य होने का दें परिचय
होली सभी को गीतसंगीत पर थिरकने की इजाजत देती है मगर इस का यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि आप तेज आवाज में अपने म्यूजिक सिस्टम का स्पीकर औन कर लें. अपने स्टीरियो, डेक आदि मद्धिम आवाज में ही चलाएं और थिरकने के लिए यह बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि आप किसी प्रकार के नशीले पेयपदार्थ या शराब इत्यादि का सेवन करें. होली का असली मजा तो पूरे होशोहवास में रहने पर ही आता है और किसी को आप को बुराभला कहे जाने की नौबत भी नहीं आती.
ध्यान रहे कि शराब, भांग तथा अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से आप के शरीर व दिमाग दोनों पर बुरा असर तो पड़ता ही है, साथ ही इस को पीने के बाद यदि आप कोई असामाजिक हरकत कर बैठते हैं तो आप के ऊपर अव्यावहारिक व्यक्ति या फिर गुंडा या गंदा आदमी होने का कलंक भी लग सकता है. नशे में व्यक्ति को अच्छेबुरे की समझ नहीं रहती है. आप अपना आपा खो कर कुछ ऐसा भी कर सकते हैं जो कि सभ्य समाज को पसंद न हो. इसलिए इस के सेवन से दूर ही रह कर होली का मजा लें.
सही कपड़ों का करें चयन 
होली खेलने तथा गीतसंगीत पर थिरकने से पहले अपने वस्त्रों का चयन अवश्य करें. होली के दिन पहने जाने वाले आप के वस्त्र ऐसे होने चाहिए जो आप के अंगों को भलीभांति ढक लें. वस्त्र अत्यधिक पुराने या फिर इधरउधर से उधड़े या कटेफटे हुए नहीं होने चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि होली की मौजमस्ती में वे फट जाएं या फिर होली की मस्त टोली, मौका पा कर एक ही झटके में उन्हें फाड़ कर अलग कर दे और आप का मजाक बन जाए. महिलाएं गहरे रंग की ब्रा तथा पैंटी अवश्य पहनें. महिलाएं ऐसे वस्त्रों का चयन कर के पहनें जो होली खेलने के दौरान भीगने पर पारदर्शी रूप न ले सकें. महिलाओं के वस्त्र गहरे रंगों के साथसाथ मोटे भी होने चाहिए. इस के अलावा परिवार के सभी व्यक्तियों को चाहिए कि होली खेलने से पहले अपने सभी कीमती आभूषण अपने शरीर पर से उतार कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर अवश्य रख दें.
आंखों का रखें विशेष ध्यान
नेत्ररोग विशेषज्ञ बताते हैं कि रंगों के आंखों में चले जाने से आंख की कौर्निया को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए जब रंग या अबीरगुलाल आप की आंखों में चला जाए तो आंख को साफ पानी से तुरंत धोना जरूरी है. ऐसी स्थिति में आंख को मलना बिलकुल भी नहीं चाहिए. बेहतर होगा कि ‘आई कप’ में साफ पानी भर कर आंख को कई बार धोया जाए. बाजार में जहां चिकित्सा का सामान मिलता है वहां ‘आई कप’ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं.
भांग का सेवन न करें
अपने देश में होली पर भांग का नशा करने का भी चलन वर्षों पुराना है. चिकित्सकों के अनुसार, हृदय रोगियों को भांग से बचना चाहिए. इस के सेवन से दिल की धड़कन बढ़ जाने के साथ ही रक्तचाप यानी ब्लडप्रैशर में भी तीव्रता से वृद्धि होती है. इस के दुष्प्रभाव से मस्तिष्क के तंतुओं पर बुरा असर पड़ता है. भांग के सेवन से यूफोरिया, याददाश्त में असंतुलन, एंग्जाइटी तथा साइको परफार्मैंस जैसे प्रमुख रोग पैदा हो जाते हैं. इसलिए होली की मस्ती में भांग की चुस्की से दूर ही रहें.

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