‘‘जब तक पापा पढ़ाएंगे तब तक पढ़ेंगे. हम तो पढ़ना चाहते हैं. पढ़ने में मन भी बहुत लगता है. रोज स्कूल आते हैं. पढ़लिख कर बड़ा आदमी बनना है.’’ यह कहते हुए 10 साल की सोनम की आंखें चमक उठती हैं. 5वीं क्लास में पढ़ने वाली उस मासूम की आंखों में कुछ कर गुजरने का सपना साफ दिखाई देता है. उस के पिता भरोसा राम बढ़ई यानी कारपेंटर का काम कर के अपने परिवार का पेट पालते हैं. सोनम कहती है, ‘‘पिताजी दिनरात मेहनत कर के उसे पढ़ा रहे हैं. कभीकभी पैसे की कमी होने पर कौपी, कलम, पैंसिल खरीदने में दिक्कत होती है, लेकिन पापा किसी भी तरह से इंतजाम कर देते हैं.’’

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