भूचाल से बेहाल नेपाल

प्रकृति से छेड़छाड़ और कमाई के बेपरवा रवैए से बिगड़ी नेपाल की सूरत. पढि़ए खास रिपोर्ट.

भूकंप के बाद नेपाल की राजधानी  काठमांडू की सड़कों और गलियों के भयावह मंजर मानो चीखचीख कर कह रहे थे कि ‘अब भी चेत जाओ वरना जान और माल गंवाने के लिए तैयार रहो’. शहर के कोटेश्वर महल्ले के ज्यादातर घर कब्रमें तबदील हो चुके हैं. नेपाल के कई लोगों से बातचीत के बाद इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि नेपालियों ने नेपाल की प्राकृतिक खूबसूरती का जम कर दोहन किया लेकिन उस के बदले में देश को कुछ दिया नहीं. जिस देश की 52 फीसदी कमाई प्राकृतिक नजारों, ऐतिहासिक इमारतों और विदेशी पर्यटकों से होती है,वहां उसे संजो कर रखने की न कोई मंशा है और न ही सरकार की कोई ठोस योजना. पहाड़ों और जंगलों के लिए दुनियाभर में मशहूर नेपाल आज कंक्रीट के बेतरतीब जंगल में बदल चुका है जिस का खमियाजा तो उसे भुगतना ही होगा.

COMMENT

नेपाल में प्रकृति का प्रकोप

प्रकृति के प्रकोप से बचने के लिए विज्ञान व तकनीक को तवज्जुह देनी होगी.

May 11, 2015

नेपाल में भयंकर भूकंप से हुई मौतों और तबाही से साफ है कि अब नई तकनीक को अपनाना जरूरी हो गया है क्योंकि मानव को यदि सुरक्षा चाहिए तो प्रकृति को पूरी तरह समझना होगा और उस से निबटने की तैयारी करनी होगी. कठिनाई यह है कि भूकंप के बाद पंडों ने प्रार्थना करनी शुरू कर दी और दुनियाभर में बजाय भूकंप पीडि़तों की सहायता के लिए पैसा व सामान जुटाने के, लोगों से कहा जाने लगा कि भूकंप पीडि़तों के लिए वे दुआ मांगें. प्रकृति अपना काम अपने तरीके से करती है और वह किसी काल्पनिक ईश्वर की नहीं सुनती. हिमालय के पहाड़ ढीली जमीन के बने हैं क्योंकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दक्षिण भारत एक द्वीप था जो एशिया महाद्वीप की ओर ढाई करोड़ साल से हर साल 3 से 4 सैंटीमीटर की गति से बढ़ रहा है. पहले जहां समुद्र था वहीं अब हिमालय है और यह प्रक्रिया आज भी जारी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस इलाके में जमीन की परतों के हिलने से भूकंप आते रहेंगे.

Tags:
COMMENT
'सरिता' पर आप पढ़ सकते हैं 10 आर्टिकल बिलकुल फ्री , अनलिमिटेड पढ़ने के लिए Subscribe Now