यह सभ्य समाज का दुख या सहानुभूति नहीं बल्कि एक रोमांच है जिस पर मीडिया ने सहानुभूति दिखाकर, असलियत पर संवेदनाओं की चादर ढकते हुए जमकर कारोबार किया. एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें दाना मांझी नाम का एक आदिवासी (निवासी कालाहांडी, राज्य ओडिशा) अपनी पत्नी अमंग देई की लाश भवानीपटना अस्पताल से कंधे पर लादकर कोई 12 किलोमीटर पैदल चला. अमंग टीबी की मरीज थी जिसे इलाज के लिए वह 60 किलोमीटर दूर अपने गाँव मेलघरा रामपुर से हफ्ते भर पहले लाया था.

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