पटना के पुराने इलाके गायघाट मुहल्ले में बने महिला रिमांड होम. ऊंचे गेट और दीवारों को लांघ कर संवासिनों की दर्द और सिसकियां गाहेबगाहे ही बाहर आ पाती हैं. उसके बाद कुछ जांच के आदेश जारी होते हैं. कुछ रिपोर्ट तैयार होती है. हालात को सुधरने का फरमान जारी होता है. कुछ दिन के बाद मामला शांत होने के बाद फिर वहीं सिसकियों का दौर चालू हो जाता है. रिमांड होम में फिलहाल 136 बंदी हैं. उनके नहाने और कपड़ा धोने की बात तो दूर, पीने के पानी का ठीक इंतजाम नहीं है. कमरों में रोशनी और हवा का आना मुहाल है. तन ढंकने के लिए ढंग का कपड़ा तक मुहैया नहीं किया जाता है. इलाज का कोई इंतजाम नहीं होने की वजह से बीमार संवासिनें तड़प-तड़प कर जान दे देती हैं और उनकी आहें ऊंची दीवारों से बाहर नहीं जा पाती हैं.

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