अंधविश्वासियों और पोंगापंथ में यकीन करने वाले गंगा नदी समेत कई नदियों में सिक्के फेंक कर यह समझते हैं कि उन्होंने झटके में काफी पुण्य कमा लिया या ईश्वर को खुश कर दिया. नदी के उपर बने पुलों से गुजरने वाले ज्यादातर लोग नदियों में चंद सिक्के फेंक यह समझते हैं कि उन्होंने मां के समान नदी में चढ़ावा चढ़ा कर उसे खुश कर दिया. उन सिक्कों के फेंकने के बाद उनकी सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी, मन की हर मुराद पूरी हो जाएगी, ईश्वर उसके घर धन-दौलत की बरसात कर देगा आदि आदि. याने जितने दिमाग उतने ही तरह के भरम और बेबकूफी की मिसाल. पोंगापंथियों की इस अंधी सोच की वजह से जहां हजारों-लाखों सिक्के बर्बाद हो रहे हैं जिसकी वजह से बाजार में छोटे कारोबारी और आम आदमी सिक्कों की भारी कमी से जूझ रहे हैं.

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