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योग धर्म की दुकानदारी हो गई है

जी हां आज के समय में योग धर्म की दुकानदारी ही हो गई है. जरा सोचिए कि क्यों आजकल बाबाओं का ताता लग रहा है? जहां, देखो वहां पर कोई न कोई बाबा योग सिखाकर पैसे कमा रहें हैं. आज कल ज्यादातर लोग फर्जी बाबा बन कर बैठे हैं. कहते हैं योग सिखा रहे हैं और लोग बस उन बाबाओं की बातों में आ जाते हैं.

जैन, पारसी, बौद्ध, ईसाई, सिख, इस्लाम हर धर्म में योग को अलग-अलग तरह से परिभाषित किया है और इसी को जरिया बनाकर हर धर्म के लोग अपने-अपने तरीके से योग की दुकान खोल कर बैठ गए हैं. मैं यहां किसी बाबा का नाम नहीं लुंगी लेकिन ये जरूर कहना चाहुंगी कि योग कोई बेचने की चीज नहीं है जिसे आज लोग दुकान बनाकर बैठे हैं.

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हर धर्म को लोग अपने-अपने तरीके से योग की कला और उसके फायदे बताते हैं अब अगर इस्लाम की बात करें तो योग और नमाज को एक ही बताया गया है. ईसाई धर्म में चेगाई सभा करके लोगों को ठीक करने का दावा किया जाता है. जैन धर्म का योग से गहरा नाता बताया गया है. योग के अंग यम और नियम ही जैन धर्म के आधार स्तंम्भ बताए गए हैं. सवाल तो ये भी उठे थे कि क्या योग केवल हिंदू धर्म में है, क्या केवल हिंदुओं को ही योग करने का हक है? लेकिन इस बात पर जोर देकर इस पर बहस करके किसी को कोई फायदा नहीं भला योग किसी एक धर्म का कैसे हो सकता है?

हम योग करते हैं ताकि हम स्वस्थ रहें और हमार मस्तिष्क भी फ्रेश रहे. केवल धर्म के नाम पर अगर योग की दुकान खोल कर बैठ जाएं तो भला ये कहां तक सही है. लेकिन आज कल के समय में तमाम धर्म ऐसे हैं जो सिर्फ अपने धर्म की बातें कहकर लोगों को भड़काते हैं और इतना ही नहीं बल्कि उनका पैसे कमाने का भी एक जरिया हो गया. जरा आप खुद इस पर विचार करिए की योग से किसी धर्म का क्या कनेक्शन है.

भला किसी धर्म को कैसे इससे फायदा मिल सकता है लेकिन आज कल कि जनता इतनी पढ़ी-लिखी होने के बाद भी ऐसे धार्मिक लोगों के बातों में आ जाती है जो धर्म को सिर्फ एक जरिया बनाकर चलता है और अपना काम निकालता है.

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आजकल की मीडिया भी कुछ खबरें इसी तरह से दिखा रही है . अभी हाल ही में जो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बीता है. उसमें चैनल की हेडलाइन्स- मुस्लिमों ने मदरसे में किया योग, ईसाईयों ने किया योग, अब इस तरह की बातें लिखने की क्या जरूरत ही पड़ती है. भारत ने मनाया योग दिवस जहां हर धर्म के लोगों ने योग किया ये क्युं लिखें हम? क्या देश के लोगों ने योग किया ये लिखना काफी नहीं है. मेरा मानना ये है इस तरह की बातें ठोंगी लोगों को बढ़ावा देती हैं अगर लोग योग को धर्म से नहीं जोड़ेंगे तो फिर इस तरह धर्म के नाम पर कोई भी योग से खिलवाड़ नहीं करेगा.

समर रेसिपी: स्ट्राबेरी लस्सी

आपको स्ट्राबेरी लस्सी बनाने की रेसिपी बताते हैं. जो आपको काफी पसंद आएगा. तो आइए जानते हैं, स्ट्राबेरी लस्सी  बनाने की रेसिपी.

सामग्री

स्ट्राबेरी प्यूरी (45 मिली.)

दही  (75 मिली.)

पीसी हुई चीनी (स्वादानुसार)

पानी या क्रशड आइस

बनाने की वि​धि

  • दही, चीनी और पानी या क्रशड आइस को ब्लेंड कर लें.
  • इसे एक गिलास मे निकाल लें और स्ट्राबेरी प्यूरी को डालकर मिलाएं, एक बहुत ही बढ़िया कलर मिलेगा.

मुंह के छालों से राहत पाने के लिए अपनाएं ये 4 टिप्स

गर्म या मसालेदार खाने से लोगों के मुंह में छाले हो जाते हैं. और अगर आप ठीक समय पर इनका इलाज नहीं करवाते हैं तो काफी दर्द होता है. मुंह में छाले की वजह से आप ठीक से खा भी नहीं पाते हैं. ऐसे में आपको काफी मुश्किल होती है. तो आइए, आपको कुछ होममेड टिप्स बताते हैं, जिससे मुंह के छालों से राहत मिलेगा.

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  1. देसी घी

छालों को ठीक करने के लिए रात को सोने से पहले देसी घी को छाले पर लगाएं. सुबह में आपको छालों में काफी आराम मिलेगा.

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2. लहसुन

लहसुन की दो-तीन कलियां लेकर इनका पेस्ट बना लें. और इस पेस्ट को छाले पर लगाएं. थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से कुल्ला कर लें.

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3. शहद

शहद भी मुंह और जीभ के छालों से राहत देने में काफी मददगार है. छालों पर रोजाना तीन-चार बार शहद लगाएं. यह छाले ठीक करने में काफी मददगार साबित होगा.

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4. बर्फ

छाले पर ठंडी चीजों से आराम मिलता है. बर्फ का टुकड़ा लें और उसे छाले पर रगड़ें. इससे छाले में आराम मिलता है.

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क्या आप जानते हैं, बालों में शैम्पू करने का सही तरीका

क्या आप जानते हैं कि आपके बाल झड़ने के कई कारण होते हैं. इन कारणों में एक कारण बालों में गलत तरीके से शैम्पू करना भी शामिल है. अक्सर आप अलग अलग तरीके से बालों में शैम्पू करती हैं और आप यही समझते हैं कि आप जिस तरह से शैम्पू कर रहे हैं वही शैम्पू करने का सही तरीका है. अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोच रहे हैं तो आप गलत हो सकते हैं क्योंकि वास्तव में ऐसा नहीं है. आपको बता दें कि बालों में शैम्पू लगाने का फायदा तभी मिलेगा जब आप शैम्पू ठीक तरह से करेंगे. तो आइये जानते हैं बालों में शैम्पू लगाने का सही तरिका क्या है.

शैम्पू करने से पहले करें कंघी

शैम्पू करने से पहले बालों को कंघी कर लेना चाहिए. ऐसा करने से बाल सुलझ जाएंगे और शैम्पू आसानी से बालों की जड़ों तक पहुंच जाएगा.

एक ही ब्रांड

हम एक ही तरह का शैम्पू और कंडीशनर इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में बालों को इनकी आदत हो जाती है और असर कम होने लगता है. मौसम के हिसाब से शैम्पू बदल लें.

गलत शैम्पू

शैम्पू लेने से पहले आप ये नहीं चेक करते की उसमे क्या है ? केमिकल सल्फेट वाले शैम्पू स्कैल्प खराब करते हैं. इसमें मौजूद पैराबीन से डेंड्रफ हो सकता है.

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शैम्पू से पहले कंडीशनर का करें इस्तेमाल

अक्सर बालों को शैम्पू करने के बाद महिलाएं कंडीशनर का इस्तेमाल करती हैं अगर आप भी ऐसा ही कर रही हैं तो आज ही इस आदत को थोड़ा बदल दीजिए. बालों में शैम्पू करने से पहले कंडीशनर का इस्तेमाल करें और उसके बाद ही बालों को शैम्पू से धोएं. ऐसा करने से बालों को पोषण मिलता है और कंडीशनिंग का बालों पर लंबे समय तक असर दिखाई देता है.

कंडीशनर का इस्तेमाल करने के बाद बालों को कम से कम 10 मिनट तक लगे रहने दें. इस बीच बालों को किसी कपड़े से ढक लें.

शैम्पू की मात्रा

ज्यादा शैम्पू लगाने से बालों को नुकसान पहुंचता है साधारणतः एक चम्मच शैम्पू काफी होता है. अगर बाल लम्बे हैं तो थोड़ा ज्यादा शैम्पू लगा सकती हैं.

पूरे बाल गीले किये बिना शैम्पू लगाना

बाल ठीक से गीले किये बिना ही हम शैम्पू लगा लेते हैं, इससे शैम्पू का असर पूरी तरह से नहीं होता. पहले बाल पूरी तरह गीले करें और फिर शैम्पू लगाएं.

सिर की त्वचा पर ही लगाएं शैम्पू

शैम्पू करते समय इस बात का ध्यान रखें कि शैम्पू बालों की बजाय सिर की त्वचा यानि कि स्कैल्प पर लगाएं. शैम्पू को बालों के किनारे या फिर बीच में लगाने से बाल नहीं बढ़ते हैं. इसलिए शैम्पू को सिर की त्वचा पर लगाकर उंगलियों के इस्तेमाल से मालिश करें.

शैम्पू का बालों की जड़ों तक पहुंचना जरूरी होता है क्योंकि वह आपकी त्वचा पर जमी गन्दगी को साफ करती है, इसलिए शैम्पू अच्छी तरह करें. ऐसा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि नाखून का इस्तेमाल न हो.

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सही समय

आप शैम्पू को लगाते ही धो लेते हैं इससे बाल ठीक से साफ नहीं हो पाते और डेंड्रफ बनता है. कम से कम 3 मिनट तक शैम्पू लगे रहने के बाद सिर धोएं.

कम से कम एक मिनट तक धोएं

कई बार जल्दी में शैम्पू सिर से पूरी तरह साफ नहीं हो पाता. शैम्पू सिर में ही जमा रहने से डेंड्रफ बढ़ता है और बाल झड़ने लगते हैं. कम से कम एक मिनट तक धोएं.

पोछने के लिए नरम कपड़े का करें इस्तेमाल

बाल बहुत नाजुक होते हैं इसलिए बालों को पोछने के लिए सख्त कपड़ो के इस्तेमाल के बजाय अपनी किसी पुरानी टी-शर्ट या फिर किसी और मुलायम कपड़े का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से बाल उलझते नहीं हैं.

दुनिया का सबसे बड़ा प्लेनेटोरियम

चीन का नवनिर्मित प्लेनेटोरियम (तारामंडल)

58,600 वर्गमीटर में फैला है. 7.8 करोड़ डौलर यानी करीब 550 करोड़ रुपए की लागत से बना यह प्लेनेटोरियम 2020 में आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. इस का निर्माण चीन के लोगों को अंतरिक्ष के बारे में जागरूक करने के लिए किया गया है.

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शंघाई में बना यह प्लेनेटोरियम 3 हिस्सों में बंटा है, जिस का प्रमुख एग्जीबिशन एरिया 3 भागों होम, यूनिवर्स और जर्नी में बंटा है. होम एरिया में अपने सोलर सिस्टम के बारे में लोगों को बताया जाएगा.

यूनिवर्स और जर्नी एरिया में ब्रह्मांड के अन्य हिस्सों के बारे में जानकारी दी जाएगी. चीन में पिछले कुछ सालों से स्पेस एक्सप्लोरेशन पर काफी जोर दिया जा रहा है. हाल ही में उस ने चांद पर अपना एक उपग्रह भेजा है.चीन 2020 में स्थाई स्पेस स्टेशन लौंच करने वाला है. इस के अलावा वह चांद पर मैन मिशन भी भेजेगा.

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काला धन

उस दिन जब उस ने मंत्रीजी को यह कहते सुना था कि काले धन को बाहर लाने के लिए हमें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है और यह फैसला लेना पड़ रहा है कि 500 व 1,000 के नोट बंद किए जाते हैं, तब दीपक कुमार, हां यही नाम था उस का, बहुत खुश हुआ था. वह फैक्टरी

में अपने साथियों से कहने लगा था, ‘‘देखना, अब अच्छे दिन जरूर आएंगे और धन्ना सेठों को अपना काला पैसा निकालना ही पड़ेगा.

‘‘अपनी फैक्टरी का मालिक भी कम थोड़े ही है. इन के पास भी बहुत काला धन है. अब तो सब सामने लाना ही पड़ेगा. देखना दोस्तो, अब तनख्वाह भी समय पर मिल जाया करेगी. अब तो कभी 10 तो कभी 15 तारीख को मिलती है.’’

उस महीने दीपक की बात सौ फीसदी सच हो गई थी. सभी मुलाजिमों को 25 तारीख को ही तनख्वाह मिल

गई थी, वह भी 500 व 1,000 के कड़कड़ाते नोट. सभी खुश थे.

दीपक तो सभी से कह रहा था, ‘‘देखो, मेरी बात सच हो गई न? अब आगेआगे देखो, होता है क्या.’’

वैसे, दीपक पिछले 17 सालों से इस फैक्टरी में काम कर रहा था. उस की समय पर सही फैसले लेने की कूवत को देखते हुए उसे परमानैंट नाइट शिफ्ट ही दे दी गई थी.

तनख्वाह के अलावा 2,000 रुपए हर महीने नाइट शिफ्ट भत्ता भी मिल जाता था. दीपक इसी में खुश था. नाइट शिफ्ट में तेज रफ्तार से हुए प्रोडक्शन

के चलते कई बार मैनेजमैंट ने ‘मजदूर दिवस’ पर उस का सम्मान भी किया था.

मैनेजमैंट तो मैनजमैंट ही होता है. निजी संस्थानों का मैनेजमैंट तो और भी सख्त होता है. यहां पर भी मैनेजमैंट द्वारा रखे गए आंखों और कानों ने दीपक की बातों का ब्योरा सभी मसालों के साथ मैनेजमैंट के सामने रख दिया.

हिंदी की एक कहावत है न कि दूध देती गाय की लात भी सहन की जाती है, शायद उसी तर्ज पर दीपक पर कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की गई थी.

अगले महीने की पहली तारीख आतेआते तक हालात साफ होने लगे. कारखाने में कच्चे माल की कमी होने लगी. इसी वजह से 5 तारीख से रात की पाली बंद करने का फैसला लेना पड़ा.

दीपक ने जब यह सूचना सुनी तो वह कारखाने के मैनेजर से मिलने पहुंचा.

‘‘दीपक, तुम… नाइट शिफ्ट के बेताज बादशाह. आज दिन में कैसे?’’ मैनेजर ने बनावटी स्वांग के साथ पूछा.

‘‘सर, नाइट शिफ्ट का प्रोडक्शन का सामान न होने के चलते कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है. मैं चाहता हूं कि इस दौरान मुझे दिन में ड्यूटी दी जाए,’’ दीपक गुजारिश करता हुआ बोला.

‘‘देखो दीपक, दिन में पूरा स्टाफ है और उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं होगा. और फिर तुम ने भी तो सुना है कि मंत्रीजी ने कहा है कि महीने 2 महीने

की दिक्कत है, फिर सब पहले जैसा हो जाएगा. बस, थोड़ा इंतजार करो.

‘‘वैसे भी तुम कई दिनों से अपने गांव नहीं गए हो, जरा गांव तक ही घूम आओ. जैसे ही नाइट शिफ्ट चालू होगी, तुम्हें सूचित कर दिया जाएगा,’’ मैनेजर ने उसे समझाने वाले लहजे में कहा.

दीपक ने सोचा कि यह भी ठीक है. मातापिता से भी वह कई दिनों से नहीं मिला. उन से मिलने चला जाता हूं. मातापिता से आराम से कुछ बातें भी हो जाएंगी.

गांव में दीपक के पिता के पास 10 बीघा जमीन है जिस में मातापिता का गुजारा आराम से हो जाता है.

जिस समय दीपक गांव में पहुंचा उस समय पिताजी घर के आंगन में ही खटिया डाल कर बैठे हुए थे. उन्होंने दूर से ही आते हुए दीपक को पहचान लिया और आवाज दे कर दीपक की मां को भी बाहर बुलवा लिया.

वे दोनों दीपक को इस तरह से बिना सूचना आए देख कर खुश भी थे और हैरान भी. जब दीपक ने अपने आने की वजह बताई और यह बताया कि वह इस बार लंबे समय तक रहेगा तो सभी खुश हो गए और मंत्री को दुआएं देने लगे.

वे दिन दीपक की जिंदगी के सब से अच्छे दिन गुजरे. गांव की ताजा व खुली हवा, पुराने यारदोस्त, मां के हाथ की ज्वार की रोटी. हालांकि पिताजी को फसलों के दाम पिछले साल की तुलना में कम मिले थे, फिर भी वे खुश थे.

धीरेधीरे एक महीना गुजर गया, पर दीपक के कारखाने से कोई फोन नहीं आया. वैसे, दीपक ने खुद कई बार फोन लगाया, पर जल्दी सूचना देने के सिर्फ आश्वासन ही मिले.

दीपक ने वापस शहर जाने का फैसला ले लिया, क्योंकि मातापिता की माली हालत भी बहुत अच्छी नहीं थी.

विवाह

शहर में घर का किराया वगैरह चुकाने के बाद उस के पास नाममात्र के पैसे बचे थे, क्योंकि शहर से जाते समय वह मातापिता के लिए कपड़े व कुछ जरूरी सामान भी ले गया था. उसे यकीन था कि फैक्टरी में रात की पाली जल्दी ही चालू हो जाएगी.

दोपहर के तकरीबन 12 बजे दीपक फैक्टरी पहुंच गया. उसे फैक्टरी मैनेजर साहब औफिस के बाहर ही मिल गए. वह उन से अपनी ड्यूटी के सिलसिले में बातें करने लगा और वह हमेशा की तरह उसे उम्मीद बंधाने वाले जवाब दे रहे थे.

‘‘बस, अगले 15-20 दिनों में माली हालत में सुधार होते ही फैक्टरी की नाइट शिफ्ट चालू कर दी जाएगी. अभी तो जो लोग काम कर रहे हैं उन की तनख्वाह ही समय पर होना मुश्किल है.

‘‘मैं इसी उधेड़बुन में बाहर निकला हूं कि कारखाने का कौन सा स्क्रैप बेच कर मुलाजिमों की तनख्वाह निकाल सकूं. तुम्हारी जानकारी में ऐसा कोई स्क्रैप हो तो बताओ,’’ आश्वासन देते हुए मैनेजर ने दीपक से पूछा.

दीपक मैनेजर को अपनी जानकारी के मुताबिक स्क्रैप के बारे में बताने लगा. तभी एक लंबी चमचमाती सफेद कार कारखाने में दाखिल हुई.

‘‘अरे, सेठजी आ गए,’’ कहते हुए मैनेजर कार की तरफ लपका.

चूंकि दीपक उस कारखाने का पुराना मुलाजिम था, इसी वजह से मालिक भी उसे पहचानते थे.

‘‘नमस्ते सर,’’ दीपक ने मालिक को देखते ही हाथ जोड़ कर कहा.

‘‘कैसे हो दीपक?’’ कार से उतर कर मालिक ने पूछा.

‘‘मैं ठीक हूं सर,’’ दीपक ने जवाब दिया.

‘‘कैसे आना हुआ?’’ मालिक ने पूछा.

‘‘सर, पिछले डेढ़ महीने से नाइट शिफ्ट बंद है. यही जानकारी लेने आया था कि कब तक फिर से चालू हो जाएंगी,’’ दीपक ने जवाब दिया.

मालिक ने इशारे से उसे अपने औफिस में आने को कहा. दीपक को लगा कि अब तो उस की ड्यूटी फिर से चालू हो ही जाएगी. आखिर इतने दिनों तक उस ने अकेले रातरात भर जाग कर अच्छा प्रोडक्शन जो दिया था. कई बार मुश्किल हालात में भी कारखाने को अच्छे से चलाए रखने का इनाम शायद आज उसे मिल जाए.

औफिस के अंदर सिर्फ 2 ही लोग थे कारखाने के मालिक और दीपक.

मालिक ने ही बात शुरू की और बोले, ‘‘हां, तो दीपक उस दिन वर्करों

से क्या कह रहे थे तुम? सेठ का काला धन अब बाहर निकल आएगा… और देखो, निकल आया.

‘‘जिसे तुम काला धन कह रहे थे, उसी धन से तुम्हारे जैसे कितने लोगों के घर के चूल्हे जल रहे थे. तुम्हारे घर वालों को दवादारू मिल रही थी. तुम्हें मिलने वाला पैसा तुम्हारे जीने का आधार था.

‘‘अब बताओ कि इस से क्या साबित हुआ? काला धन किस के पास था? मेरे पास या तुम्हारे पास? मैं तो जितना खाना तब खाता था उतना ही अब भी खा रहा हूं. भूखा कौन मर रहा है? तुम्हारे जैसे मेहनती लोग न? तो फिर काला धन किस के पास हुआ और किस का निकला? तुम्हारा ही न?

‘‘देखो, मैं जो देख रहा हूं उस के मुताबिक कम से कम 6 महीने तक तो यह फैक्टरी पूरे तौर पर नहीं चल पाएगी. तुम चाहो तो दूसरी नौकरी ढूंढ़ लो, पर मैं जहां तक जानता हूं तकरीबन हर इंडस्ट्री की हालत ऐसी ही है. अब तुम जा सकते हो.’’

दीपक भारी कदमों से औफिस के बाहर निकल गया. घर जाते समय सोच रहा था कि इस से तो काला धन ही बेहतर था. कम से कम करोड़ों मजदूरों को रोजगार तो मिला हुआ था. घर चल रहा था, बच्चे पढ़ रहे थे.

सोचतेसोचते दीपक एक बगीचे में पहुंच गया. यहां लोग सुबहशाम घूमने के लिए आते हैं. पर इस दोपहरी में भी वहां पर कई लोग बैठे थे जो उस के जैसे ही थे. वे भी आसपास की फैक्टरियों में रोजगार तलाश रहे थे.

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अब दीपक को मालिक के शब्द सही लगने लगे थे. पहले जो लोग मलाई खा रहे थे, वे तो अब भी गाढ़ा दूध पी रहे हैं, पर जो लोग सूखी रोटी खा रहे थे, वे बेचारे तो भूखे ही मर रहे हैं. गलती कौन कर रहा है और सजा कौन पा रहा है. ठीक है कि अगले 10-15 सालों का भारत अलग होगा, पर आज जो मर रहे हैं, उन का क्या? इस माहौल में जो बच्चे बड़े हो रहे हैं, क्या वे इन कमियों की वजह से अपराधी नहीं बनेंगे?

बेहतर होता कि इस के दूरगामी नतीजों की जांचपड़ताल कर इस फैसले को धीरेधीरे असरदार ढंग से लागू किया जाता. एक अपराध को रोकने की वजह दूसरे अपराधों की जन्मदाता तो नहीं होती.

पता नहीं, दीपक को कब गहरी नींद लग गई. इतनी गहरी कि फिर कभी उठ ही नहीं पाया. लोग कह रहे थे, दिल के दौरे से मौत हुई थी.

तो ये एक्ट्रेस निभाएगी दयाबेन का किरदार?

सब टीवी पर प्रसारित होने वाले शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन का किरदार दिशा वकानी अब नहीं निभाएंगी. दिशा की जगह ये एक्ट्रेस ‘विभूति शर्मा’ किरदार निभाएगी. खबरों के मुताबिक, मेकर्स ने दयाबेन के रोल के लिए सीरियल बड़े अच्छे लगते हैं फेम एक्ट्रेस विभूति शर्मा को साइन किया जा सकता है.

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आपको बता दें, विभूति शर्मा  ‘बड़े अच्छे लगते हैं’, ‘हमने ली शपथ; जैसे शोज कर चुकी हैं. विभूति शर्मा ने दयाबेन के किरदार के लिए मौक टेस्ट दिया है. दयाबेन के लुक को विभुति ने बहुत अच्छे से अपनाया और उसका किरदार भी विभुति ने बेहद अच्छे तरीके से प्ले किया. मेकर्स उन्हें दयाबेन के लिए साइन कर सकते हैं. हालांकि, विभूति ने इन खबरों को अफवाह बताया है.

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हाल ही में ऐसी भी खबरें आई थीं कि फैंस को दयाबेन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा. दरअसल, शो के मेकर्स दयाबेन को लाने की जल्दी में नहीं हैं. शो के मेकर्स ने अभी के लिए दयाबेन के किरदार को होल्ड पर रखा है. मेकर्स दयाबेन की कास्ट के लिए कोई जल्दी में नहीं हैं. वो दयाबेन के लिए एक्ट्रेस ढूंढ़ रहे हैं, जो दयाबेन का किरदार परफेक्शन के साथ निभा सके. इसीलिए जल्दबाजी नहीं करना चाहते.

मेरा कनेक्शन कहीं न कहीं सलमान खान से जुड़ा हुआ है: हेमा शर्मा

टीवी सीरियल‘‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’’ से अभिनय करियर की शुरूआत करन वाली गैर फिल्मी परिवार की हेमा शर्मा 2018 में धर्मेंद्र, सनी देओल व बाबी देओेल के साथ फिल्म ‘‘यमला पगला दीवाना फिर से’’ में एक छोटे से किरदार यानी कि कृति खरबंदा की सहेली के रूप में नजर आयी थी. अब 5 जुलाई को प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘वन डे जस्टिस डिलिवर’ में छोटे किरदार में हैं. जबकि 17 जून से ‘स्टार प्लस’ पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘हम कहां तुम कहां’’ के हर एपीसोड में नजर आ रही हैं. तो वहीं वह ‘दबंग 3’ और ‘भुज’ जैसी हिंदी फिल्में कर रही हैं. बहुत जल्द वह कन्नड़ फिल्म में शिवराज के साथ हीरोइन बनकर आने वाली हैं.

अब तक की अपनी यात्रा को लेकर क्या कहना चाहेंगी?

मैं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली हूं. अभिनय की शुरूआत कैसे हुई, यह मुझे भी समझ नहीं आया. पर सबसे पहले मैंने 2015 में दुबई में गोविंदा जी के साथ एक डांस शो में डांस किया था, जिसमें मेरे साथ ईषा देओल, नेहा धूपिया, सहित कई अभिनेत्रियां थीं. दुबई में मेरे डांस को काफी प्रशंसा मिली. इससे मुझे प्रोत्साहन मिला. फिर मैंने ‘कलर्स’ पर प्रसारित सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में अभिनय किया. इसमें मैंने सृष्टि का किरदार निभाया. जब सम्राट अशोक का स्वयंवर चल रहा था, तो पांच रानीयों में से एक रानी सृष्टि भी थी. करीबन छह माह तक मैं इस सीरियल में नजर आती रही. उसके बाद मुझे लगा कि अभिनय को गंभीरता से लेना चाहिए. इसलिए मैंने अभिनय की ट्रेनिंग हासिल की. कुछ विज्ञापन फिल्में भी की. 2018 में मैंने धर्मेंद्र, सनी देओल व बौबी देओल के साथ फिल्म ‘‘यमला पगला दीवाना फिर से’’ में अभिनय किया. इस फिल्म में मेरी जोड़ी कृतिका खरबंदा के साथ थी. मैं उनकी सहेली बनी थी. एक अच्छा किरदार था. मुझ पर और कृति पर एक गाना भी फिल्माया गया था, जिसके बोल थे- ‘‘लिटिल लिटिल..’’.धर्मेंद्र के साथ काम करके मुझे बहुत मजा आया. मैं नसीब वाली हूं कि मुझे पहली फिल्म धर्मेंद्र जी के साथ मिली. अब पांच जुलाई को मेरी दूसरी फिल्म ‘‘वन डे जस्टिस डिलिवर’’ रिलीज होने वाली है.

फिल्म‘‘वन डे जस्टिस डिलिवर’’में आपने क्या किया हैं?

इस फिल्म में मेरा स्पेशल अपियरेंस है. मैंने वेडिंग का गाना किया है, जिसके बोल हैं-चू हिला लो. यानी कि हिप हिला लो. दर्शकों को आकर्षित करने के लिए गाने के बोल इस तरह के रखे गए हैं. यह एक ऐसा गाना है, जिसे सुनते ही जिन्हें डांस करना नहीं आता, वह भी डांस करने लगेंगे. मेरी राय में फिल्म में ऐसे गाने ही होने चाहिए, जिन पर डांस ना जानने वाले लोग भी डांस कर सके. अब तक इस गाने को पांच लाख लोग देख चुके हैं. इस गाने के अंदर लोग मुझे एक चुलबुली लड़की के किरदार में देखेंगे.

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फिल्म की कहानी में आपका किरदार कहां आएगा?

देखिए, मैंने पहले ही कहा कि मैंने स्पेशल अपियरेंस किया है. तो सिर्फ इस गाने में ही नजर आउंगी. यह जज (अनुपम खेर) की बेटी की शादी का गाना है, मैं जज(अनुपम खेर) की रिश्तेदार के किरदार में हूं. इस गाने में कुमुद मिश्रा,नमुरली शर्मा, राजेश शर्मा, अनुपम खेर सभी हैं. शादी ब्याह में अक्सर लड़के व लड़कियों के बीच मस्ती भरी नोकझोक होती है. तो जब वर पक्ष का एक लड़का मुझे छेड़ता है, तो मैं उसे गाने में जवाब देती हूं. यह फिल्म बहुत ही गंभीर विषय पर है, जिसमें रहस्य और रोमांच भी है. इसलिए फिल्म में गाने ज्यादा हैं नहीं. मेरे किरदार को बढ़ाने की गुंजाइश भी नही थी.

इन दिनों नया क्या कर रही हैं?

इन दिनों मैं ‘स्टार प्लस’ पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘हम कहां तुम कहां’’ कर रही हूं. अभी पंद्रह दिन पहले ही इसका प्रसारण शुरू हुआ है. इसमें एक अभिनेत्री और डौक्टर की प्रेम कहानी है. मैं इसमें एक छोटी बच्ची प्रीति की मां का किरदार निभा रही हूं. प्रीति के दिल में छेद है, तो उसे डौक्टर से मिलाना है. यह काम मैं ही करती हूं. इसके अलावा प्रीति उस अभिनेत्री की प्रशंसक है, जिसके साथ डौक्टर का संपर्क होगा. तो प्रीति की मां अपनी बेटी को डौक्टर से मिलवाने का प्रयास करती है. मेरी वजह से ही यह दोनों मिलते हैं और प्यार का सिलसिला शुरू होता है. मेरा किरदार प्रीति के इर्दगिर्द हमेशा नजर आता रहेगा. सीरियल में मेरा किरदार बहुत ही सोफास्टिक किरदार है. सीरियल के दूसरे एपीसोड में ही मेरा किरदार स्थापित किया गया. अभी तो हम माह में 15 दिन शूटिंग कर रही हूं. इसके अलावा मैं सलमान खान प्रोडक्शन की फिल्म ‘‘दबंग 3’’ में पत्रकार का किरदार निभा रही हूं

सलमान खान के साथ जुड़ना कैसे हुआ?

‘‘यशराज स्टूडियो’’ में शूटिंग चल रही थी. मैं यशराज स्टूडियो गयी हुई थी, तो वहीं पर मेरी मुलाकात सलमान खान प्रोडक्शन के नदीम वगैरह से हुई. फिर मेरा नसीब कि मेरा सलमान के घर ग्लैक्सी अपार्टमेंट में आना जाना शुरू हो गया. मैं उनके यहां गणपति विसर्जन के समय भी शामिल होती हूं. सलमान खान की मां सलमा, पिता सलीम खान, उनकी दोनों बहनें और दोनों बहनोई मेरा बहुत सम्मान करते हैं. मुझे लगता है कि मेरा कनेक्शन कहीं न कहीं सलमान खान से जुड़ा हुआ है. फिल्म ‘यमला पगला दीवाना फिर से’ में भी सलमान खान ने एक छोटा सा किरदार निभाया था. फिल्म‘दबंग 3’ में की शुरूआत मेरे ही किरदार से होती है. मैं ही लोगों को सलमान खान से इंट्रोड्यूस करवाती हूं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह फिल्म 20 दिसंबर यानी कि मेरे जन्मदिन पर ही रिलीज होने वाली है. इसलिए मैं नसीब पर बहुत यकीन करती हूं.

dhramendra

तो अब आपका करियर सही दिशा में दौड़ रहा है?

ऐसा कह सकते हैं. मैं दक्षिण भारत की एक फिल्म कर रही हूं जो कि कन्नड़ भाषा में होगी. इस कन्नड़ फिल्म में मेरे हीरो कन्नड़ भाषा के सुपर स्टार शिवराज हैं. यह फिल्म पुलिस वालों की कहानी है, इससे अधिक अभी नही बता सकती. इसके अलावा एक फिल्म ‘‘भुज’’ कर रही हूं. दो फिल्में और हैं.

आप फिल्मों में छोटे छोटे किरदार निभा रही हैं.क्या इससे करियर आगे बढ़ेगा?

देखिए, मैं स्टार बेटी तो हूं नहीं. गैर फिल्मी परिवार से आयी हूं, तो काफी संघर्ष करना पड़ा. पर मेरा मानना है कि यदि आपके अंदर प्रतिभा है, तो आप पूरी फिल्म में एक सीन करके भी प्रभाव डाल सकते हैं. पर शुरूआत तो होनी चाहिए थी. मैंने फिल्मों में छोटे किरदार निभाकर शुरूआत की और अब कन्नड़ फिल्म में हीरोइन बनकर आने वाली हूं. मेरी राय में यदि जनता ने आपको छोटे किरदार में भी पसंद कर लिया, तो फिल्मकार आपको सबसे पहले अपनी फिल्मों के लिए बुलाएंगे. आपके अंदर प्रतिभा है, इसे साबित करने के लिए छोटे किरदार भी काम आते हैं. ‘‘यमला पगला दीवाना फिर से’’ जैसी बड़ी फिल्म में करियर की शुरूआत में ही सात सीन और एक गाना मिलना बहुत बड़ी बात है.

आप किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

देखिए, मुझे अवार्ड की चाहत नहीं है. मैं लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाना चाहती हूं. मैं अपने अभिनय से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना  चाहती हूं. छोटी सी उम्र में मैंने बहुत कटु अनुभव हासिल कर लिए. तो कुछ अच्छे अनुभव भी हासिल किए हैं. भविष्य में क्या होगा, मुझे भी नहीं पता. पर जिस तरह से मेरा करियर आगे बढ़ रहा है, उससे उत्साहित हूं. मुझे नारी प्रधान किरदार निभाने हैं. मुझे मेरी जिंदगी से रिलेट करने वाले किरदार निभाने हैं.

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आप वेब सीरीज नहीं कर रही हैं?

नहीं, मैं वेब सीरीज का नाम सुनते ही डर जाती हूं. क्योंकि इन दिनों वेब सीरीज में ग्लैमर, सेक्स व डबल मीनिंग के संवाद ही ठूंसे जा रहे हैं. लड़की को वेब सीरीज में बोल्ड ही दिखाना है. मेरी आदर्श स्मिता पाटिल व शबाना आजमी हैं. मैं दिल से काम करना चाहती हूं. कमर के नीचे से काम नहीं करना है. मैं अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हूं. मैं काम के साथ साथ इज्जत कमाना चाहती हूं. मैंने एकता कपूर की कंपनी ‘आल्ट बालाजी’ की वेब सीरीज ‘‘बू सबकी फटेगी’’ ठुकरा दी. इस सीरीज में मेरे सह कलाकार तोतले नहीं चोतले थे. मैं आलजी के बारे में आपके सामने इस वेब सीरीज के किरदार के बारे में बात न कर पाती.

फिशिंग गेम के शौकिन हैं तो जरूर जाएं यहां

अंडमान निकोबार जोकि भारत का एक द्वीप समूह है. चारो तरफ से समुद्र से घिरा यह आईलैंड अपने प्रकृति नजारों और अपनी खूबसूरती के लिये मशहूर है. अगर आप अपने छुट्टियां मनाने की प्लानिंग कर रही हैं तो हम आपको कहेंगे की एक बार अंडमान की सैर पर जरुर जाएं सबसे खास बात जो यहां की है वो यह की यह एक फिशिंग स्पौट भी है. इस बार इन सब का आनंद लेने के लिये आप यहां जरुर आएं और फिशिंग का भी लुत्फ उठाएं.

राधानगर बीच

हैवलौक का राधानगर बीच अंडमान निकोबार के बेस्‍ट बीच में से एक है. एक मैगजीन द्वारा दुनिया के 7वें बेस्‍ट बीच की रैंक में शामिल हो चुका है. यहां स्‍पार्क जैसी चमकती रेत में सनसेट का एक अलग ही मजा है. राधानगर बीच पर स्नोर्कलिंग, फिसिंग गेम, स्‍वीमिंग और स्कूबा डाइविंग आदि पयर्टकों के लिए हैं.

एलीफैंट बीच

एलीफैंट बीच भी अंडमान और निकोबार समुद्र तट के खूबसूरत बीच में से एक है. हैवलौक द्वीप से इस बीच में जानें के लिए नाव से या फिर 30 मिनट के जंगल के रास्‍ते को पार करके जा सकते हैं. शांत समुद्र तट के शांत पानी का नेवी रंग, विविध प्रकार के समुद्री जीव और स्नोर्कलिंग का अलग ही मिलता है.

वि‍जयनगर बीच

हैवलौक का वि‍जयनगर बीच भी शानदार है. यहां पानी हवा में उछलता दिखाई देता है. तैराकी, नौकायन, फोटोग्राफी और वाटर सर्फिंग के लि‍ए यह बीच परफेक्‍ट है. यहां पर बीच के किनारे प्रकृति की खूबसूरती देखते ही बनती है. समुद्र के नीले पानी के कि‍नारे महुआ के पेड़ों की छाव का नजारा बेहद शानदार लगता है.

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काला पत्‍थर बीच

काला पत्‍थर बीच का नाम भले ही सुनने में थोड़ा अटपटा लगता हो लेकि‍न यह बेहद खूबसूरत‍ है. हैवलौक आईलैंड में आने वाले पयर्टक यहां पर खूब मस्‍ती करते हैं. बीच के किनारे हल्‍की धूप में किताब पढ़ने या फिर चांदी से चमकते रेत में बैठने पर लगता है मानों हैवेन में बैठे हों. यह बीच पयर्टकों का मन मोह लेता है.

वंडूर बीच

वंडूर बीच मोस्‍ट अंडमान निकोबार का काफी पौपुलर बीच है. यह बीच महात्मा गांधी नेशनल मरीन पार्क के प्रवेश द्वार पर स्‍थ‍ित है. इसमें बड़ी संख्‍या में समुद्री जीव आते हैं. फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह किसी स्‍वर्ग से कम नही है. यहां इस बीच के किनारे पयर्टकों को टहलने में बहुत अच्‍छा लगता है.

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अजब गजब: गांव की आबादी 110, लेकिन बकरियां 500

यह खूबसूरत नजारा नार्वे के एक गांव अंडरेडेल का है, जो नार्वे के पश्चिमी  तट के शहर बर्जन से 2 घंटे की दूरी पर है. इस साधनसंपन्न गांव की खासियत यह है कि यहां की कुल आबादी 110 है. इस गांव में इंसानों की जनसंख्या भले ही कम है लेकिन भेड़ें यहां 500 से अधिक हैं.

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सच्चाई यह है कि सुंदर नैसर्गिक छटा वाले इस गांव के लोगों की आय का प्रमुख साधन बकरी के दूध से बनी भूरे रंग की चीज है. चीज बनाने के लिए यहां 8 चीज फार्म हैं, जो हर साल 9 से 11 हजार किलो चीज तैयार करते हैं. पुराने परंपरागत तरीके से बनी इस चीज की काफी मांग है.

क्योंकि इस में फैटी एसिड की प्रचुर मात्रा की वजह से इस का स्वाद अलग होता है और प्रोटीन कम होने की वजह से यह ज्यादा क्रीमी होता है.

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