बेटी के जीवन पर पिता का बहुत प्रभाव पडता है. शादी के बाद अगर पति के साथ सामंजस्य बन जाये तो कोई भी पीछे नहीं रहता. दिल्ली की पलीबढी मालविका हरिओम के पिता सत्यपाल मांगिया को कवितायें लिखने का शौक था. उनकी बेटी मालविका को भी कविता और गजल लिखने का शौक हो गया. जेएनयू में पढ़ाई के दौरान मालविका की लिखी कविताओं की प्रशंसा सभी ने की. मालविका की शादी डाक्टर हरिओम से हुई तो वह भी बहुत अच्छा गाते थे. शादी के बाद पति हरिओम ने पत्नी को आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया. इस प्रोत्साहन के बाद मालविका ने कवितायें और गजल लिखना शुरू किया.

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