देश की राजनीति बड़े उबाऊ दौर से गुजर रही है, जिससे लगता ऐसा है कि अब गाय, दलित और नव राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से सभी ने समझौता कर एक बड़े बहुमत वाली सरकार के सामने घुटने टेक दिये हैं. हताश बसपा प्रमुख मायावती राज्यसभा से इस्तीफा देकर लखनऊ लौट गईं हैं, ममता बनर्जी की दहाड़ रिरियाहट में बदलती जा रही है, लालू यादव अपने कुनबे को लेकर चिंतित हैं तो मुलायम सिंह भगवा खेमे की शरण में हैं. और तो और बात बात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की उद्योगपतियों से सांठ गांठ को हवा देकर विपक्षी चूल्हे में आंच बनाए रखने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कहीं अते पते नहीं हैं. वे आखिरी बार कब क्या बोले थे शायद ही किसी को याद हो.

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