ऊपरी तौर पर भले ही समाजवादी पार्टी का बंटवारा चुनाव के पहले टल जाये पर तेरा-मेराके विवाद में सपा को अब अपने ही बागी उम्मीदवारों का सामना करना पड़ेगा. इससे सबसे अधिक खुशी बसपा-भाजपा को है. भाजपा को अगड़े और पिछड़े वोट अपनी तरफ आते दिख रहे हैं तो बसपा को मुसलिम वोटों के अपनी ओर आने का भरोसा हो गया है. अब वह ज्यादा से ज्यादा मुसलिम प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने की फिराक में हैं.

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