जब आप पहली दफा तारेक फतह से रूबरू हों, तो आप को खुद के सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कन्डेय काटजू के सामने होने की गलतफहमी हो सकती है. वजह महज यह नहीं कि एक हैयर स्टाइल को छोड़ फतह और काटजू की शक्ल सूरत नैन नक्श और चश्मा तक भी मिलते जुलते हैं, बल्कि इन दोनों मे एक अदभुद समानता मुंहफट होने की भी है. फर्क इतना है कि काटजू बिना सोचे समझे कहीं भी कुछ भी बोल सकते हैं, जबकि फतह की न केवल जुबान से बल्कि जिस्म के रोएं रोएं से पाकिस्तान के खिलाफ जहर रिस्ता रहता है.

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