अकर्मण्यता, अंधविश्वास और व्यक्तिपूजा की पराकाष्ठा देखनी है तो पिछले ढाई महीनों से तमिलनाडु में देखी जा सकती है, जहां जे. जयललिता के बीमार होने से मृत्यु तक घरों, सड़कों, स्कूल, कौलेजों, बाजारों, मंदिरों और विधानसभा तक में हवन, पूजापाठ, मंत्रोच्चारण चल रहे थे. चैन्नई के अपोलो अस्पताल के बाहर 24 घंटे हजारों लोग जयललिता के स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हुए खड़े रहे. 33 लोगों ने तो अब तक आत्महत्या कर ली, कुछ के प्रयास नाकाम हो गए.

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