हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद पूरे देश में विक्षोभ का ज्वार उमड़ पड़ा है. दलित आक्रोशित हैं, कई शहरों में जुलूस, प्रदर्शन हो रहे हैं और राजनीतिक दलों के बीच सियासत गरमाई हुई है. केंद्र की भाजपा सरकार निशाने पर है. रोहित को जिन हालातों में आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा, वह समाज और व्यवस्था कठघरे में है. आत्महत्या की यह घटना आज 21वीं सदी में देश के शिक्षण संस्थानों में पनप रही जातीय भेदभाव, वैमनस्य की बर्बर और शर्मनाक प्रवृति की पराकाष्ठा है.

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