नीतीश कुमार ने संघवाद और भाजपा के खिलाफ देशव्यापी मुहिम छेड़ने के लिए तमाम समाजवादियों और सियासी दलों को एक झंडे तले लाने की कवायद शुरू कर दी है. इसके पीछे उनकी निगाहें साल 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव पर टिकी हुई हैं. सभी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की राह में कई झमेले हैं पर इस सुर को छेड़ कर फिलहाल नीतीश नेशनल हीरो तो बन ही गए हैं. इसके साथ ही वह बिहार की सीमा से बाहर निकल कर दिल्ली में भाजपा को चुनौती देने और खुद को प्रधानमंत्री का दावेदार बनने की राह में अपना पहला कदम बढ़ा दिया है.

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