नीतीश कुमार ने करीब 5 महीने पहले पटना पुस्तक मेले के उद्घाटन में पद्मश्री चित्रकार बऊआ देवी द्वारा बनाए कमल के फूल में रंग भरा था, वह आखिर सच साबित हो गया. उसी समय से कयास लगाए जाने लगे थे कि नीतीश कुमार भाजपा की ओर बढ़ रहे हैं. लालू नीतीश गठबंधन का टूटना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. यह शुरू से ही दिख रहा था. 20 महीने पहले दोनों नेता जब बिहार में भाजपा को पटखनी दे कर सरकार बना रहे थे तभी कहा जाने लगा था कि यह बेमेल गठजोड़ है, ज्यादा नहीं चलेगा.

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