राजनीतिक दलों की चुनावी यात्राओं का नाम भले ही रथयात्रा हो, असल में वह आरामदायक कार की यात्रायें हैं. जिसमें सुविधा का हर साजोसामान मौजूद है. रथ यात्राओं के चुनावी उत्सव में नेताओं के आराम का ख्याल रखने का पूरा काम होता है. नेता के समर्थक भी रथयात्रा में पीछे चलने के लिये आरामदायक लग्जरी एसी कारों का प्रयोग कर रहे हैं. 5 साल सत्ता में रहकर सुविधाभोग चुके यह नेता शरीर से इतने कमजोर हो चुके हैं कि यह आरामदायक एसी कार के बिना चल ही नहीं सकते थे. रथ यात्राओं में जुटने वाली भीड़ सड़क पर जाम का कारण बनती है, जिससे जनता परेशान होती है. जबकि नेता एसी गाड़ियों में गरमी में भी ठंडी हवाओं का लुत्फ ले रहे होते हैं. कुछ समय पहले बसपा नेता मायावती की सभा में भीड, उमस और गरमी को शिकार होकर रैली में आने वालों की मौत हो गई थी. इसके बाद भी नेता सबक नहीं ले रहे, भीड़ जमा कर अपनी ताकत दिखाने से बाज नहीं आ रहे.

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